BJP News: BJP ने आखिरी वक्त पर फेंका ऐसा पासा, मुश्किल में फंसीं कांग्रेस, MP राज्यसभा चुनाव में बड़ा खेला: मध्य प्रदेश के सियासी गलियारों में इस समय जबरदस्त हलचल मची हुई है। देश के इस दिल कहे जाने वाले राज्य में राज्यसभा की जंग अब बेहद रोमांचक और कांटे की हो चुकी है। भारतीय जनता पार्टी ने अचानक एक ऐसा बड़ा दांव चल दिया है, जिसने विपक्षी दल कांग्रेस के खेमे में खलबली मचा दी है। (BJP News) चुनावी मैदान की तीसरी सीट पर भी बीजेपी ने अपना आखिरी उम्मीदवार उतार कर सबको चौंका दिया है। (BJP News) दिलचस्प बात यह है कि आंकड़ों के लिहाज से सत्ताधारी दल के पास इस तीसरी सीट को अपने पाले में करने के लिए पूरे नंबर नहीं हैं। इसके बावजूद बीजेपी का यह कदम सीधे तौर पर कांग्रेस की दिग्गज महिला नेता मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ एक बड़े चक्रव्यूह का संकेत दे रहा है। इस नए घटनाक्रम के बाद से ही राज्य की राजनीति में विधायकों के पाला बदलने यानी क्रॉस वोटिंग की चर्चाएं जोरों पर हैं।
BJP News: भोपाल में आधी रात की बैठक और केवट पर दांव
इस पूरे सियासी ड्रामे की पटकथा रविवार को लिखी गई। सूबे की तीन राज्यसभा सीटों के लिए बीजेपी ने पहले ही अपने दो बड़े दिग्गजों, तरुण चुघ और रजनीश अग्रवाल के नामों का ऐलान कर दिया था, जिन्होंने शनिवार को अपना पर्चा भी भर दिया। (BJP News) लेकिन असली खेल रविवार को हुआ जब राजधानी भोपाल में मुख्यमंत्री आवास पर देर तक चली एक गुप्त बैठक में रणनीति बदली गई। इस बैठक में जमीनी हकीकत को भांपने के बाद मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष महेश केवट को तीसरे चेहरे के रूप में मैदान में उतारने का फैसला हुआ, जिसे दिल्ली की केंद्रीय कमान ने भी तुरंत मंजूरी दे दी।
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कांग्रेस की बढ़ी धड़कनें और जीत का गणित
विधानसभा के मौजूदा आंकड़ों के हिसाब से कांग्रेस के पास अपनी उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन को आसानी से जिताने के लिए पर्याप्त विधायक मौजूद हैं। लेकिन महेश केवट के अचानक सामने आ जाने से अब यह मुकाबला सीधा न रहकर शह और मात के खेल में बदल गया है। (BJP News) मध्य प्रदेश की 230 सदस्यों वाली विधानसभा में इस बार केवल 228 विधायक ही अपने मत का इस्तेमाल कर पाएंगे। इसमें एक विधायक के वोट देने पर कानूनी पाबंदी है और एक अन्य विधायक का रुख अभी साफ नहीं है, जिसका सीधा नुकसान विपक्ष को उठाना पड़ सकता है। फिलहाल सदन में बीजेपी के पास 164 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के पाले में 64 का आंकड़ा है, जो घटकर 62 तक पहुंच सकता है।
चुनावी रण में दस वोटों का असली सस्पेंस
इस चुनाव के कड़े नियमों के मुताबिक, किसी भी एक उम्मीदवार को संसद के ऊपरी सदन में पहुंचने के लिए कम से कम 58 विधायकों के समर्थन की जरूरत होगी। इस गणित से बीजेपी अपने दो प्रत्याशियों को बेहद आसानी से जिता लेगी, लेकिन अपनी तीसरी सीट के लिए उसे अभी भी 10 और वोटों की सख्त जरूरत पड़ेगी। (BJP News) दूसरी तरफ, कांग्रेस अगर अपनी एक सीट जीत भी लेती है, तब भी उसके पास चार अतिरिक्त वोट बचेंगे। अगर आने वाली 18 जून को होने वाले मतदान में किसी भी तरह की अंतरात्मा की आवाज या क्रॉस वोटिंग का खेल नहीं होता है, तो मीनाक्षी नटराजन की राह बेहद आसान रहेगी।
दावों और इशारों के बीच छिपी असली कहानी
इस बड़े सियासी घमासान के बीच कांग्रेस पूरी ताकत से एकजुटता का दावा कर रही है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने साफ़ किया है कि उनके सभी विधायक चट्टान की तरह पार्टी और अपनी उम्मीदवार के साथ खड़े हैं और किसी भी तरह की फूट की खबरें सिर्फ अफवाह हैं। (BJP News) हालांकि, सूबे के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने एक दिन पहले ही मुस्कुराते हुए बड़ा इशारा कर दिया था कि तीसरी सीट आखिर जाएगी कहां। उनके साथ ही संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भी साफ कर दिया था कि अगर पार्टी तीसरा उम्मीदवार उतारती है, तो उसे जिताने के लिए हर मुमकिन कोशिश की जाएगी। अब देखना यह है कि 18 जून को मध्य प्रदेश की इस तीसरी सीट का ताज किसके सिर सजता है।















