Chaitra Navratri Day 1: चैत्र नवरात्रि का आरंभ अत्यंत शुभ माना जाता है और इसका पहला दिन खास तौर पर मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री को समर्पित होता है। इस दिन विधि-विधान से पूजा करने पर पूरे नौ दिनों की साधना सफल मानी जाती है और जीवन में नई ऊर्जा का संचार होता है। (Chaitra Navratri Day 1) नवरात्रि की शुरुआत घटस्थापना या कलश स्थापना से होती है, जो घर में शुभता और सकारात्मक ऊर्जा के प्रवेश का प्रतीक मानी जाती है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार मां शैलपुत्री पर्वतराज हिमालय की पुत्री हैं। इन्हें माता पार्वती का ही प्रथम स्वरूप माना जाता है। उनका स्वरूप अत्यंत दिव्य और शांत होता है—माता सफेद वस्त्र धारण करती हैं, दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल का फूल रहता है। उनके मस्तक पर अर्धचंद्र सुशोभित होता है और वे नंदी बैल पर विराजमान रहती हैं। यही कारण है कि इन्हें वृषारूढ़ा और उमा के नाम से भी जाना जाता है। मां का यह रूप करुणा, धैर्य और शक्ति का प्रतीक है, जो भक्तों को जीवन में स्थिरता और साहस प्रदान करता है।
Chaitra Navratri Day 1: जानते हैं मंत्र, भोग और घटस्थापना मुहूर्त…
चैत्र नवरात्रि 2026 कलश स्थापना का मुहूर्त
नवरात्रि के पहले दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए और घर तथा पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ करना चाहिए। (Chaitra Navratri Day 1) इसके बाद गंगाजल छिड़ककर स्थान को पवित्र किया जाता है। शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना करना अत्यंत आवश्यक होता है। कलश में जल भरकर उसमें आम के पत्ते लगाए जाते हैं और ऊपर नारियल स्थापित किया जाता है। इसके बाद जौ बोए जाते हैं, जो आने वाले दिनों में अंकुरित होकर शुभ संकेत देते हैं। यह पूरी प्रक्रिया समृद्धि और उन्नति का प्रतीक मानी जाती है।
पहला मुहूर्त: सुबह 6:52 बजे से 7:43 बजे तक
दूसरा मुहूर्त: अभिजीत मुहूर्त- दोपहर 12:05 बजे से 12:53 बजे तक
पूजा के दौरान मां शैलपुत्री का ध्यान करते हुए दीपक जलाएं, धूप-अगरबत्ती अर्पित करें और उन्हें चंदन, कुमकुम और फूल चढ़ाएं। (Chaitra Navratri Day 1) इसके बाद मंत्रों का जाप करना विशेष फलदायी माना जाता है। “ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः” मंत्र का जाप करने से मन को शांति मिलती है और जीवन में सकारात्मकता बढ़ती है। साथ ही “वन्दे वाञ्छितलाभाय…” मंत्र का उच्चारण करने से मनोकामनाएं पूर्ण होने की मान्यता है।
मां शैलपुत्री के मंत्र
-ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः॥
-वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
वृषारुढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥
माता शैलपुत्री देवी कवच
ओमकार:में शिर: पातुमूलाधार निवासिनी।
हींकार,पातुललाटेबीजरूपामहेश्वरी॥
श्रीकार:पातुवदनेलज्जारूपामहेश्वरी।
हूंकार:पातुहृदयेतारिणी शक्ति स्वघृत॥
फट्कार:पातुसर्वागेसर्व सिद्धि फलप्रदा।
देवी शैलपुत्री का प्रार्थना मंत्र
वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥
मां शैलपुत्री की आरती
शैलपुत्री मां बैल पर सवार।
करें देवता जय जयकार।
शिव शंकर की प्रिय भवानी।
तेरी महिमा किसी ने ना जानी।।
पार्वती तू उमा कहलावे।
जो तुझे सिमरे सो सुख पावे।
ऋद्धि-सिद्धि परवान करे तू।
दया करे धनवान करे तू।।
सोमवार को शिव संग प्यारी।
आरती तेरी जिसने उतारी।
उसकी सगरी आस पुजा दो।
सगरे दुख तकलीफ मिला दो।।
घी का सुंदर दीप जला के।
गोला गरी का भोग लगा के।
श्रद्धा भाव से मंत्र गाएं।
प्रेम सहित फिर शीश झुकाएं।
जय गिरिराज किशोरी अंबे।
शिव मुख चंद्र चकोरी अंबे।।
मनोकामना पूर्ण कर दो।
भक्त सदा सुख संपत्ति भर दो।
माता शैलपुत्री को इन चीजों का लगाएं भोग
नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा मे भोग में विशेष रूप से गाय के घी और दूध से बनी चीजें अर्पित की जाती हैं। आप माता को बर्फी, खीर या दूध से बने मिष्ठान्न का भोग लगा सकते हैं। इसके अलावा शुद्ध घी का भोग भी अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे स्वास्थ्य अच्छा रहता है और रोगों से मुक्ति मिलती है। पूजा के बाद मां की आरती करना और प्रसाद को परिवार के सदस्यों में बांटना शुभ माना जाता है।















