
CM Yogi Adityanath: मालेगांव बम धमाके के मामले में सालों चली जांच और सुनवाई के बाद मुंबई की विशेष अदालत ने प्रज्ञा ठाकुर, कर्नल पुरोहित समेत सातों आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया है। कोर्ट ने साफ कहा कि अभियोजन पक्ष अपने दावे साबित नहीं कर सका। इस केस में अब एक के बाद एक चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। (CM Yogi Adityanath) दरअसल, केस में एक गवाह मिलिंद जोशी ने ऐसा बयान दिया, जिससे सबको हैरानी हुई। उन्होंने बताया कि उन्हें दबाव डालकर आरएसएस, योगी आदित्यनाथ और मोहन भागवत का नाम इस केस में घसीटने को कहा गया था। जोशी का कहना है कि उन्हें कई दिनों तक हिरासत में रखकर जबरन बयान देने की कोशिश की गई।
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CM Yogi Adityanath: क्या है भगवा आतंकवाद की कहानी?
इस केस से जुड़े एक अधिकारी महबूब मुजावर ने भी चौंकाने वाली बात कही है। उन्होंने कहा कि पूरे मामले को इस तरह पेश किया गया मानो ‘भगवा आतंकवाद’ का माहौल बनाया जा रहा हो। मुजावर का मानना है कि तत्कालीन सरकार हिंदुत्व से जुड़ी छवि और संगठनों को बदनाम करना चाहती थी। (CM Yogi Adityanath) आपको बता दें कि सीएम योगी हिंदुत्व का फायरब्रांड चेहरा था…वहीं मोहन भागवत भी आरएसएस के शीर्ष नेताओं में शामिल थे। इसके कारण दोनों के फंसाने की साजिश रची जा रही थी।
किन-किन पर लगे थे आरोप?
इस केस में सांसद प्रज्ञा ठाकुर, लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित, रिटायर्ड मेजर रमेश उपाध्याय, अजय राहिरकर, समीर कुलकर्णी, सुधाकर चतुर्वेदी और सुधाकर धर द्विवेदी आरोपी थे, जिन्हें हाल ही में कोर्ट ने बरी कर दिया है।
इन सभी को कोर्ट ने बरी करते हुए कहा कि धर्म के नाम पर आतंक का ठप्पा लगाना ठीक नहीं है। (CM Yogi Adityanath) कोई भी धर्म हिंसा की इजाजत नहीं देता और केवल कहानियों के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
क्या हुआ था 2008 में?
29 सितंबर 2008 को मालेगांव के भीकू चौक पर खड़ी एक दोपहिया वाहन में बम धमाका हुआ था, जिसमें 6 लोगों की जान चली गई थी, जिनमें सभी मुस्लिम थे। पहले केस स्थानीय पुलिस के पास था, फिर जांच एटीएस को दी गई। घटनास्थल से मिली बाइक का नंबर प्रज्ञा ठाकुर के नाम पर निकला था, जिससे यह केस और उलझ गया था।









