Dussehra 2025: उत्तर भारत के राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश में दशहरे पर रामलीला का आयोजन बहुत धूमधाम से होता है। रामलीला में भगवान राम की कथा मंच पर दिखाई जाती है और राम और रावण के युद्ध को दिखाया जाता है। दशहरे के दिन रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के बड़े पुतले जलाए जाते हैं जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक होते हैं। लोग इस त्योहार में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं, रंग-बिरंगी झांकियों और संगीत का आनंद उठाते हैं। (Dussehra 2025) खासकर लखनऊ, कानपुर, नोएडा और वाराणसी जैसे शहरों में रावण दहन बड़े पैमाने पर होता है और इसमें आतिशबाजी और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होते हैं। इसे विजयादशमी भी कहा जाता है और यह दशमी तिथि पर आता है, जो भगवान राम द्वारा रावण वध की याद दिलाता है।
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Dussehra 2025: महाराष्ट्र
महाराष्ट्र में दशहरा शक्ति और विजय का प्रतीक माना जाता है। यहाँ विजयादशमी पर देवी दुर्गा की पूजा होती है और तलवार पूजन की परंपरा पुरानी है। (Dussehra 2025) किसान अपने नए कृषि उपकरणों की पूजा करते हैं। पुणे और मुंबई में मेले, नृत्य, नाटक और संगीत के कार्यक्रम होते हैं।
कर्नाटक
कर्नाटक के मैसूर में दशहरा महोत्सव बहुत प्रसिद्ध है और यह दस दिनों तक चलता है। यहाँ महाराज के दरबार का आयोजन, हाथियों पर सजाए जुलूस और सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं। विजयादशमी के दिन भव्य जुलूस मुख्य आकर्षण होता है।
पश्चिम बंगाल
पश्चिम बंगाल में दशहरे का मतलब दुर्गापूजा है। (Dussehra 2025) दस दिन तक देवी की पूजा होती है और दसवें दिन उनका विसर्जन ‘विश्वरूप दशमी’ या विजयादशमी के रूप में किया जाता है। यह उत्सव कला, संस्कृति और भक्ति का प्रतीक है।
असम
असम में दशहरा बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। यहाँ रावण दहन के साथ लोकनृत्य और संगीत का आयोजन होता है।
गुजरात
गुजरात में दशहरे पर गरबा और डांडिया नृत्य के जरिए देवी दुर्गा की भक्ति दिखाई जाती है। तलवार और शस्त्र पूजन भी होते हैं, जो नए काम की शुरुआत और विजय का संकेत हैं।
राजस्थान
राजस्थान में दशहरा युद्ध और लोककला का पर्व है। यहाँ रावण दहन, युद्धाभिषेक और राजपूत परंपराओं का प्रदर्शन होता है। जनजातीय समुदाय लोकनृत्यों और गीतों से उत्सव को और रंगीन बनाते हैं।















