Etah News: एटा जनपद में ओवरलोडिंग का अवैध खेल बेखौफ तरीके से जारी है। शहर के प्रमुख मार्गों पर छोटे-बड़े वाहन खुलेआम नियमों की अनदेखी करते हुए तेज रफ्तार में दौड़ रहे हैं। आरोप है कि क्षेत्रीय पुलिस, ट्रैफिक पुलिस और एआरटीओ विभाग की कथित मिलीभगत के चलते यह अवैध गतिविधियां लगातार फल-फूल रही हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कथित रूप से पैसे लेकर “नो एंट्री” क्षेत्रों में भी दिनभर वाहनों को गुजरने दिया जाता है। (Etah News) इसके चलते शहर में लगातार जाम की स्थिति बनी रहती है और आमजन को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बाबूगंज से हाथी दरवाजा, रोडवेज से पाठक होटल चौराहा तथा ठंडी सड़क तक का इलाका सबसे ज्यादा प्रभावित है, जहां सुबह से देर रात तक लंबा जाम लगा रहता है।
इसी बीच वसूली को लेकर ट्रैफिक पुलिस और एक ट्रैक्टर चालक के बीच विवाद का मामला सामने आया। बताया जा रहा है कि ओवरलोड ईंटों से भरे ट्रैक्टर के चालक ने ट्रैफिक पुलिस के सिपाही प्रशांत कुमार पर ट्रैक्टर चढ़ाने का प्रयास किया। (Etah News) विवाद बढ़ने पर टीएसआई द्वारा उक्त ट्रैक्टर को सीज कर चालक के खिलाफ कार्रवाई की गई। पुलिस के अनुसार चालक नशे में था और तेज रफ्तार से ट्रैक्टर चला रहा था, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई। स्थानीय निवासी प्रमोद कुमार का कहना है कि रातभर मिट्टी और भूसे से भरे ट्रैक्टर अवैध खनन कर सड़कों पर दौड़ते रहते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि शिकायत करने पर पुलिसकर्मी ही शिकायतकर्ता की जानकारी खनन माफियाओं को दे देते हैं और दबाव बनाकर शिकायत वापस लेने को कहा जाता है।
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Etah News: क्या कहते हैं नियम:
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार, किसी भी वाहन को निर्धारित क्षमता से अधिक भार लेकर चलना पूरी तरह प्रतिबंधित है। (Etah News) ओवरलोडिंग करने पर भारी जुर्माना, वाहन जब्ती और ड्राइविंग लाइसेंस निलंबन तक की कार्रवाई का प्रावधान है। इसके अलावा शहरों में लागू “नो एंट्री” नियम का उल्लंघन करने पर भी दंडात्मक कार्रवाई निर्धारित है।
इसके बावजूद एटा में नियमों की खुलेआम अनदेखी हो रही है, जिससे न केवल यातायात व्यवस्था चरमरा रही है बल्कि हादसों का खतरा भी लगातार बढ़ता जा रहा है। (Etah News) इस संबंध में एआरटीओ एटा सतेन्द्र कुमार से फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका फोन नहीं उठ सका। अब देखना यह है कि प्रशासन और संबंधित विभाग इस मामले में कब सख्त कदम उठाते हैं।
















