India Iran Talk: पश्चिम एशिया की धरती इस वक्त बारूद के ढेर पर बैठी है। एक तरफ ईरान की तमतमाती आंखें हैं, तो दूसरी तरफ अमेरिका और इजरायल की घातक सैन्य कार्रवाई। दुनिया की धड़कनें तेज हैं क्योंकि मामला अब सिर्फ दो देशों का नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा से जुड़ गया है। (India Iran Talk) इसी भयंकर तनाव के बीच, भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने मोर्चा संभाला है। उन्होंने ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची से फोन पर लंबी बात की है, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
India Iran Talk: समंदर में छिड़ी जंग और ईरान का तीखा प्रहार
ईरानी विदेश मंत्री के साथ जयशंकर की यह बातचीत तब हुई है जब ईरान ने अपने नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई के नाम का ऐलान कर दिया है। यह बदलाव तब हुआ जब अमेरिका और इजरायल के हमले में अयातुल्ला अली खामेनेई की जान चली गई। (India Iran Talk) अराघची ने बातचीत के दौरान सीधे तौर पर अमेरिका को घेरा। उन्होंने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य और फारस की खाड़ी में जहाजों का रास्ता जो आज असुरक्षित हुआ है, उसके पीछे अमेरिका और इजरायल की आक्रामकता जिम्मेदार है। ईरान का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अब अमेरिका की जवाबदेही तय करनी चाहिए।
भारत की चिंता और तेल का बढ़ता खेल
भारत के लिए यह संकट किसी बड़ी मुसीबत से कम नहीं है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का वो संकरा रास्ता है जहाँ से पूरी दुनिया का लगभग 20% तेल और गैस गुजरता है। ईरान ने इस रास्ते को लगभग बंद कर दिया है, जिससे वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें आसमान छूने लगी हैं। (India Iran Talk) जयशंकर ने साफ तौर पर ईरान को भारत की गहरी चिंताओं से अवगत कराया है। भारत अपनी जरूरत का 85% तेल बाहर से मंगाता है, ऐसे में अगर यह समुद्री रास्ता बंद रहता है, तो भारतीय अर्थव्यवस्था पर इसका सीधा और बुरा असर पड़ेगा।
करोड़ों भारतीयों की सुरक्षा और कूटनीति
सिर्फ तेल ही नहीं, खाड़ी देशों में रहने वाले करीब एक करोड़ भारतीय नागरिकों की जान भी इस वक्त दांव पर है। (India Iran Talk) उनकी सुरक्षा भारत सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। जयशंकर ने न केवल ईरान, बल्कि जर्मनी और दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्रियों से भी इस संकट पर चर्चा की है। भारत का रुख एकदम साफ है: हिंसा तुरंत रुकनी चाहिए और बातचीत की मेज सजनी चाहिए।














