Kedarnath Dham Opening 2026: हिमालय की बर्फीली वादियों में आज सुबह एक बार फिर आस्था की दिव्य गूंज सुनाई दी। जैसे ही सुबह ठीक आठ बजे शुभ मुहूर्त में केदारनाथ मंदिर के कपाट खुले, पूरा धाम ‘हर-हर महादेव’ और ‘जय बाबा केदार’ के जयघोषों से गूंज उठा। हजारों श्रद्धालु इस पावन क्षण के साक्षी बने, किसी की आंखों में आंसू थे, तो कोई हाथ जोड़कर शिव के दरबार में नतमस्तक था।
Kedarnath Dham Opening 2026: विधि-विधान के साथ खुले कपाट, शिवमय हुआ वातावरण
बुधवार सुबह तय लग्न के अनुसार वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ कपाट खोले गए। जैसे ही मंदिर के द्वार खुले, सामने बाबा केदार का दिव्य स्वरूप दिखाई दिया और श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर पहुंच गया। मंदिर परिसर घंटियों की ध्वनि, डमरू की गूंज और जयघोषों से पूरी तरह शिवमय हो गया।
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51 कुंतल फूलों से सजा बाबा का दरबार
इस बार केदारनाथ धाम को करीब 51 कुंतल फूलों से भव्य रूप से सजाया गया है। (Kedarnath Dham Opening 2026) रंग-बिरंगे फूलों से सजा मंदिर किसी स्वर्गिक लोक जैसा नजर आ रहा था। श्रद्धालु इस अलौकिक सजावट को देखकर मंत्रमुग्ध हो गए और हर कोई इस पल को अपने कैमरे और दिल में कैद करता नजर आया।
सीएम पुष्कर सिंह धामी ने की विशेष पूजा
कपाट खुलने के इस खास अवसर पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी धाम पहुंचे। (Kedarnath Dham Opening 2026) उन्होंने विधिवत पूजा-अर्चना कर प्रदेश और देश की सुख-समृद्धि की कामना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि केदारनाथ यात्रा केवल धार्मिक नहीं, बल्कि उत्तराखंड की आस्था, संस्कृति और अर्थव्यवस्था का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है।
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पंचमुखी डोली की 17 किमी कठिन यात्रा
कपाट खुलने से पहले बाबा केदार की पंचमुखी चल विग्रह उत्सव डोली ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ से रवाना होकर केदारनाथ धाम पहुंची। इस डोली ने जंगलचट्टी, रामबाड़ा, लिनचोली और बेस कैंप जैसे कठिन पड़ावों को पार करते हुए लगभग 17 किलोमीटर की यात्रा पूरी की। धाम पहुंचने पर श्रद्धालुओं ने फूलों की वर्षा कर डोली का भव्य स्वागत किया। डोली ने मंदिर की परिक्रमा कर भंडार गृह में प्रवेश किया, जहां विशेष पूजा-अर्चना संपन्न हुई। इस दौरान 8वीं सिखलाई रेजीमेंट के बैंड और डमरू की ध्वनि ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। पुलिस और आईटीबीपी के जवान हर जगह तैनात हैं। (Kedarnath Dham Opening 2026) यात्रा मार्ग पर स्वास्थ्य सेवाएं, हेल्प डेस्क और आपातकालीन सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं ताकि श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो।
केदारनाथ धाम का धार्मिक महत्व
केदारनाथ मंदिर भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और हिंदू धर्म में इसका विशेष महत्व है। मान्यता है कि महाभारत के बाद पांडव अपने पापों का प्रायश्चित करने के लिए यहां आए थे। तब भगवान शिव ने उन्हें दर्शन दिए और यही स्थान केदारनाथ के रूप में प्रसिद्ध हुआ। (Kedarnath Dham Opening 2026) हर साल लाखों श्रद्धालु इस कठिन यात्रा को पूरा कर बाबा केदार के दर्शन करने आते हैं। समुद्र तल से लगभग 11,755 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह धाम आस्था, साहस और प्रकृति के अद्भुत संगम का प्रतीक है।
इस वर्ष केदारनाथ यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। कपाट खुलने से पहले ही लाखों लोगों ने यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन करा लिया था। देश ही नहीं, विदेशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा के दर्शन के लिए पहुंचे हैं।
केदारनाथ यात्रा केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि एक अद्भुत अनुभव है। (Kedarnath Dham Opening 2026) ऊंचे पहाड़, बर्फ से ढकी चोटियां, बहती मंदाकिनी नदी और कठिन ट्रेक यह सब मिलकर इस यात्रा को अविस्मरणीय बना देते हैं। हर कदम पर हर-हर महादेव की गूंज श्रद्धालुओं को नई ऊर्जा से भर देती है।
प्रशासन की अपील
प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे मौसम की जानकारी लेकर ही यात्रा पर निकलें, जरूरी सामान साथ रखें और स्वास्थ्य संबंधी सावधानियां बरतें। (Kedarnath Dham Opening 2026) साथ ही, यात्रा के दौरान नियमों का पालन करें ताकि सभी के लिए यात्रा सुरक्षित और सुखद बनी रहे। केदारनाथ धाम के कपाट खुलने के साथ ही चारधाम यात्रा का भी विधिवत आगाज हो गया है। यह केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था और विश्वास का प्रतीक है।















