Lok Sabha Election 2024: लोकसभा चुनाव 2024, झारखंड के फॉर्मूले से यूपी में सीट बंटवारा क्यों चाह रही है कांग्रेस?

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Lok Sabha Election 2024: देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में इंडिया गठबंधन का सीट बंटवारा फंसता नजर आ रहा है. कांग्रेस यहां झारखंड वाला फॉर्मूला लागू करना चाहती है, लेकिन सपा तैयार नहीं है. हालात यहां तक हो गई है कि कांग्रेस ने अब खुद ही 80 सीटों पर लड़ने की बात कह दी है.

उत्तर प्रदेश से इंडिया गठबंधन में अभी तक समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय लोक दल और कांग्रेस शामिल है. कांग्रेस की कोशिश इंडिया गठबंधन में मायावती की पार्टी बहुजन समाज पार्टी को भी शामिल कराने की है. (Lok Sabha Election 2024) उत्तर प्रदेश में लोकसभा की सबसे अधिक 80 सीटें हैं.
इंडिया गठबंधन में सीट बंटवारे की जिम्मेदारी कॉर्डिनेशन कमेटी के पास है. कमेटी ने राज्य स्तर पर सीट विवाद सुलझाने का फैसला किया है. सपा से कमेटी में जावेद अली और कांग्रेस से केसी वेणुगोपाल इस कमेटी के सदस्य हैं.

उत्तर प्रदेश में यह पहली बार है, जब सपा और कांग्रेस एक साथ मिलकर लोकसभा चुनाव लड़ने की बात कह रही है. 2017 में दोनों विधानसभा का चुनाव मिलकर लड़ चुकी है.

सीट बंटवारे का झारखंड फॉर्मूला क्या है?

2019 के चुनाव में कांग्रेस ने सीट बंटवारे को लेकर झारखंड में सहयोगी झारखंड मुक्ति मोर्चा के साथ समझौता किया था. इस समझौते के तहत लोकसभा चुनाव में कांग्रेस तो विधानसभा चुनाव में जेएमएम ने ज्यादा सीटों पर लड़ने का फैसला किया.

2019 के चुनाव में झारखंड के 14 में से 7 सीटों पर कांग्रेस ने उम्मीदवार उतारे. 4 सीटों पर जेएमएम लड़ी, जबकि बाबूलाल मरांडी की पार्टी जेवीएम के खाते में 2 सीटें गई. लालू यादव की पार्टी आरजेडी को भी समझौते के तहत एक सीट पर उम्मीदवार उतारने का मौका मिला.

हालांकि, गठबंधन भारतीय जनता पार्टी के मुकाबले बुरी तरह हारी. 14 में से कांग्रेस-जेएमएम को सिर्फ 1-1 सीटों पर जीत मिली.

विधानसभा चुनाव में सीट बंटवारे का यही समीकरण पलट गया. झारखंड की 81 में से 41 सीटों पर जेएमएम ने उम्मीदवार उतारे, जबकि कांग्रेस के खाते में 31 सीटें गई. गठबंधन के सहयोगी आरजेडी को भी 7 सीटें मिली.

इस बार सीट बंटवारे का यह समझौता गठबंधन के लिए फायदेमंद साबित हुआ. 41 सीटों पर लड़ने वाली जेएमएम ने 29 सीटों पर जीत हासिल की. कांग्रेस को 18 और आरजेडी को 1 सीट पर जीत मिली.

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस क्या चाह रही है?
झारखंड की तरह उत्तर प्रदेश में भी कांग्रेस लोकसभा में सपा से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है. कांग्रेस यहां की 80 में से 40 सीटों पर दावा ठोक रही है. पार्टी के सीटों को इंडिया गठबंधन के दलों में बांटने की बात कह रही है.

कांग्रेस इसके पीछे 2009 के रिजल्ट का तर्क दे रही है. 2009 में कांग्रेस यूपी की 69 सीटों पर चुनाव लड़ी थी, जिसमें से 21 सीटों पर उसे जीत मिली थी. पार्टी अलीगढ़ समेत कई सीटों पर दूसरे नंबर पर भी रही थी.

2009 के बाद कांग्रेस ने यूपी में जीत के लिए कई प्रयोग किए. हालांकि, पार्टी हर बार असफल ही रही. 2019 में कांग्रेस की पारंपरिक सीट अमेठी से भी पार्टी के तत्कालीन अध्यक्ष राहुल गांधी को करारी हार का सामना करना पड़ा था.

कांग्रेस की कोशिश सपा से वो सीटें झटकने की है, जिस पर पिछले चुनाव में मायावती की पार्टी ने लड़ी थी. 2019 में बीएसपी ने 38 सीटों पर सपा से समझौते के तहत अपने उम्मीदवार उतारे थे. बीएसपी को 10 सीटों पर जीत भी मिली थी.

सीट बंटवारे पर कौन क्या कह रहा है?

लखनऊ में पत्रकारों के एक सवाल पर सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने कहा कि सपा किसी से सीट मांग नहीं रही है, बल्कि दे रही है. अखिलेश ने आगे कहा कि समाजवादियों का इतिहास त्याग का रहा है. हमने जिस भी दल के साथ गठबंधन किया है, उससे सीट बंटवारे को लेकर कभी झगड़ा नहीं हुआ है.

2017 में समाजवादी पार्टी ने कांग्रेस को 105 सीटें दी थी, जिसमें से पार्टी सिर्फ 7 सीटों पर जीतने में सफल हुई थी. कांग्रेस को इतनी ज्यादा सीटें देने पर सपा के भीतरखाने ही अखिलेश यादव का विरोध हो गया था. बाद में अखिलेश ने भी अपनी गलती मानी.
2019 में अखिलेश यादव ने मायावती की पार्टी के साथ गठबंधन किया और समझौते के तहत बीएसपी के लिए 38 सीटें छोड़ दी. सपा खुद 37 सीटों पर चुनाव लड़ी, इसमें से 19 सीटें ऐसी थी, जहां पर पार्टी को कभी जीत नहीं मिली थी. इसमें लखनऊ, वाराणसी, सीतापुर जैसी सीटें शामिल थी.

इधर, अखिलेश यादव के बयान के बाद कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने कहा है कि हम 80 सीटों पर मजबूती से तैयारी कर रहे हैं.

रिपोर्ट्स के मुताबिक कांग्रेस ने यूपी की सभी 80 सीटों को 3 कैटेगरी में बांट लिया है. पहली कैटेगरी में उन 30 सीटों को शामिल किया है, जहां जीत की संभावनाएं पार्टी को दिख रही है. वहीं दूसरी कैटेगरी में उन 30 सीटों को शामिल किया गया है, जहां पार्टी मुकाबला करने की स्थिति में है.

साथ ही यूपी की 20 सीटें ऐसी है, जहां कांग्रेस को जीत की उम्मीद नहीं है. पार्टी ने इन सीटों को सी कैटेगरी में शामिल किया है. यहां अकेले चुनाव लड़ने की स्थिति में कांग्रेस डमी कैंडिडेट उतारेगी.

सीट बंटवारे को लेकर नहीं है तय फॉर्मूला

इंडिया गठबंधन के कॉर्डिनेशन कमेटी की मीटिंग में सीट शेयरिंग को लेकर एक फॉर्मूला तय करने की बात कही गई, लेकिन सभी दलों के सहमत नहीं होने की वजह से फाइनल फॉर्मूला नहीं बन पाया है. गठबंधन में सीट शेयरिंग का 3 फॉर्मूला चर्चा में है.

1. 2019 में जीती हुई सीटों पर संबंधित पार्टियों की दावेदारी मजबूत मानी जाएगी. यानी जो जहां से अभी जीता है, वहां टिकट की पहली दावेदारी उसी पार्टी की होगी. हालांकि, यह नियम कश्मीर-पंजाब जैसे राज्यों में लागू नहीं होगा. यहां सीट सिलेक्शन का पहला फॉर्मूला जिताऊ कैंडिडेट होगा.

2. तमिलनाडु, झारखंड में सीट शेयरिंग का पुराना फॉर्मूला ही चलेगा. यहां कांग्रेस 2019 से ही सहयोगी दलों के साथ गठबंधन में है. हालांकि, झारखंड में जेएमएम की इच्छा लोकसभा में अधिक सीटों पर लड़ने की है.

3. महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, बिहार, पश्चिम बंगाल और केरल में सीट बंटवारे का नया फॉर्मूला बनेगा. कहीं विधानसभा चुनाव के डेटा तो कहीं लोकसभा चुनाव के डेटा के आधार पर सीट का वितरण किया जाएगा.

कॉर्डिनेशन कमेटी की मीटिंग के बाद बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने दावा किया था कि इंडिया गठबंधन में सीट शेयरिंग को लेकर कोई दिक्कत नहीं है, सारी चीजें ‘स्मूथली’ चल रही हैं.

2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की स्थिति

2019 के चुनाव में कांग्रेस को यूपी की एकमात्र रायबरेली सीट पर जीत मिली थी, जबकि पार्टी अमेठी, कानपुर और फतेहपुर सीकरी में दूसरे नंबर पर रही थी. अमेठी से राहुल गांधी, कानपुर से प्रकाश जायसवा और फतेहपुर सीकरी से राज बब्बर चुनाव मैदान में थे.

2019 में सीतापुर सीट से दूसरे नंबर पर रहने वाले बीएसपी के नकुल दुबे भी अब कांग्रेस में आ चुके हैं. इस हिसाब से 5 सीटों पर कांग्रेस के पास मजबूत उम्मीदवार हैं. कांग्रेस इसके अलावा गाजियाबाद, बिजनौर, जालौन और कुशीनगर सीट पर भी दावा ठोक सकती है.

यूपी के ब्राह्मण, दलित और मुस्लिम समीकरण को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस ने 2022 में यूपी के 3 नेताओं को राज्यसभा भेजा था. यूपी में इन नेताओं के भी चुनाव लड़ने की चर्चा है.

अखिलेश सिर्फ जिताऊ उम्मीदवार को तरजीह देने के मूड में

यूपी में अखिलेश यादव सिर्फ जिताऊ उम्मीदवार को तरजीह देने के मूड में हैं. सपा यूपी के कई सीटों पर बड़े चेहरे को चुनाव लड़ाना चाहती है. हाल ही में यह खबर आई थी कि सपा कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को यूपी के इटावा या बाराबंकी सीट से चुनाव लड़ने का ऑफर दिया है.

इससे पहले नीतीश कुमार के फूलपुर से चुनाव लड़ने की चर्चा थी. फूलपुर सीट से कभी पंडित जवाहरलाल नेहरु, राम मनोहर लोहिया और जैनेश्वर मिश्र चुनाव लड़ चुके हैं. जानकारों का मानना है कि अखिलेश की कोशिश बड़े नेताओं को चुनाव लड़ाकर ज्यादा से ज्यादा सीटें जीतने की है.

जिताऊ उम्मीदवारों के साथ-साथ छोटी पार्टियों को अखिलेश यादव ज्यादा तरजीह देने की रणनीति पर काम कर रहे हैं. कहा जा रहा है कि 5-6 सीट जयंत चौधरी की पार्टी को सपा दे सकता है. इसी तरह चंद्रशेखर आजाद की भीम आर्मी और अपना दल कमेरावादी को भी 1-1 सीटें मिल सकती है.

रिपोर्ट्स के मुताबिक समाजवादी पार्टी ने सीट समझौते के लिए पहले उन सीटों को चिह्नित किया है, जो पिछले चुनाव में उसके लिए जी का जंजाल बन गया था. सपा ने ऐसी 19 सीटों को कांग्रेस, आरएलडी और भीम आर्मी में बांटने की तैयारी की है.

ये सीटें हैं- बागपत, मेरठ, गाजियाबाद, नोएडा, अलीगढ़, मथुरा, आगरा, हाथरस, बरेली, कानपुर, पीलीभीत, धौरहरा, गोंडा, बस्ती, वाराणसी, सुल्तानपुर और लखनऊ.

गठबंधन के लिए यूपी सबसे संवेदनशील राज्य

विपक्षी गठबंधन के लिए 80 सीटों वाली उत्तर प्रदेश सबसे संवेदनशील राज्य है. 2019 और 2014 में भारतीय जनता पार्टी ने यहां एकतरफा जीत दर्ज की थी. भारतीय जनता पार्टी हाईकमान ने इस बार भी यूपी में 75 प्लस सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है. 2019 में एनडीए गठबंधन को 73 और 2014 में 64 सीटों पर जीत मिली थी.

वोट प्रतिशत के हिसाब से भी देखा जाए, तो यूपी में भारतीय जनता पार्टी गठबंधन का पलड़ा अभी भारी है. 2022 के डेटा के मुताबिक भारतीय जनता पार्टी गठबंधन के पास अभी 45 प्रतिशत वोट है, जबकि सपा गठबंधन के पास सिर्फ 35 प्रतिशत.
12 प्रतिशत वोट लाने वाली मायावती की पार्टी ने यूपी में अकेले चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है. हालांकि, इंडिया गठबंधन के कई दल बीएसपी को मनाने में जुटी हुई है. मायावती अगर अकेले चुनाव लड़ती है, तो यूपी में वोट प्रतिशत के मामले में भारतीय जनता पार्टी का पलड़ा भारी रहेगा.

https://youtu.be/fViepgMebvo?si=Wslw9z-Cqt8yXfnp

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