Rajya Sabha Election 2026: महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर वही पुरानी कहावत सच होती दिख रही है कि राजनीति में न कोई स्थाई दोस्त होता है और न दुश्मन। राज्यसभा चुनाव के नतीजों ने महाविकास अघाड़ी (MVA) के भीतर छिपे उस ज्वालामुखी को विस्फोट की कगार पर ला खड़ा किया है, जो पिछले काफी समय से सुलग रहा था। (Rajya Sabha Election 2026) शरद पवार का राज्यसभा के लिए चुना जाना वैसे तो एक सामान्य प्रक्रिया लग सकती है, लेकिन इस जीत ने उद्धव ठाकरे और उनके परिवार को गहरे सदमे और नाराजगी में डाल दिया है। सूत्रों की मानें तो ठाकरे परिवार ने पहले ही पवार का समर्थन न करने का मन बना लिया था, लेकिन कांग्रेस के दांव ने उन्हें बीच मजधार में लाकर खड़ा कर दिया। आखिर क्यों ‘चाणक्य’ कहे जाने वाले शरद पवार पर उद्धव सेना को अब भरोसा नहीं रहा?
Rajya Sabha Election 2026: पर्दे के पीछे की सीक्रेट मीटिंग और उद्धव की दो टूक
इस पूरे ड्रामे की शुरुआत तब हुई जब एनसीपी (शरद पवार गुट) की नेता सुप्रिया सुले और जयंत पाटिल खुद उद्धव ठाकरे को मनाने मातोश्री पहुंचे थे। दो घंटे तक चली लंबी चर्चा और मान-मनौव्वल के बावजूद उद्धव ठाकरे का दिल नहीं पसीजा। (Rajya Sabha Election 2026) शिवसेना यूबीटी के नेताओं के अनुसार, उद्धव ने स्पष्ट कर दिया था कि वे शरद पवार का व्यक्तिगत सम्मान करते हैं, लेकिन इस बार राज्यसभा सीट पर शिवसेना का हक बनता है। उद्धव का रुख साफ था कि उनकी पार्टी अपने उम्मीदवार को दिल्ली भेजना चाहती थी। आदित्य ठाकरे भी कई मौकों पर यह कह चुके हैं कि बीजेपी के खिलाफ असली लड़ाई सिर्फ शिवसेना यूबीटी और कांग्रेस लड़ रही है, बाकी दलों की स्थिति अभी भी धुंधली है।
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कांग्रेस के ‘हाथ’ ने बढ़ाई उद्धव की मुश्किल
शिवसेना यूबीटी को सबसे बड़ा झटका तब लगा जब कांग्रेस ने शरद पवार की उम्मीदवारी को अपना समर्थन दे दिया। सुप्रिया सुले की मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात के बाद जैसे ही कांग्रेस ने पवार के नाम पर मुहर लगाई, उद्धव ठाकरे के पास विकल्प खत्म हो गए। शिवसेना यूबीटी के नेताओं का मानना है कि पवार गुट और सत्ताधारी गुट के बीच विलय की जो अटकलें चल रही हैं, उससे पार्टी की साख पर सवाल उठ रहे हैं। (Rajya Sabha Election 2026) आदित्य ठाकरे की नाराजगी इस बात से साफ झलकती है कि उन्होंने सार्वजनिक रूप से कह दिया कि उनके हक के लिए उन्हें अब 2028 तक इंतजार करना होगा। इस बयान ने साफ कर दिया है कि एमवीए गठबंधन के तीन पहियों में से एक अब पूरी तरह से डगमगा चुका है।
राज्यसभा की सात सीटें और नए समीकरणों का उदय
महाराष्ट्र से राज्यसभा की सात सीटों के लिए हुए इस चुनाव में किसी प्रकार का मतदान नहीं हुआ क्योंकि केवल सात ही उम्मीदवार मैदान में थे। शरद पवार के साथ-साथ केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले और भाजपा के दिग्गज नेता विनोद तावड़े भी निर्विरोध चुने गए। (Rajya Sabha Election 2026) दिलचस्प बात यह है कि अजित पवार के बेटे पार्थ पवार भी राज्यसभा पहुंच गए हैं, जिससे पवार परिवार का दबदबा संसद के उच्च सदन में और बढ़ गया है। वहीं, एकनाथ शिंदे गुट की ज्योति वाघमारे ने भी अपनी जगह पक्की की है। (Rajya Sabha Election 2026) लेकिन इन सब चेहरों के बीच सबसे ज्यादा चर्चा उद्धव ठाकरे की चुप्पी और आदित्य ठाकरे के तीखे तेवरों की है। क्या यह नाराजगी महाविकास अघाड़ी के अंत की शुरुआत है? यह सवाल अब पूरी मुंबई में गूंज रहा है।















