Ram Mandir Theft: 22 जनवरी 2024 की वह ऐतिहासिक तारीख कोई कैसे भूल सकता है, जब अयोध्या में प्रभु श्रीराम के भव्य मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा हो रही थी. देश के प्रधानमंत्री से लेकर दुनिया भर के साधु-संत और राम जन्मभूमि आंदोलन के तपस्वी कारसेवक इस दिव्य पल के साक्षी बने थे. कारसेवकों की आंखों से खुशी के आंसू बह रहे थे, जिन्होंने कभी मंदिर के लिए लाठियां और गोलियां खाई थीं. इसके ठीक अगले दिन यानी 23 जनवरी 2024 को जब मंदिर के कपाट आम जनता के लिए खुले, तो रामलला की एक झलक पाने के लिए सारे पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त हो गए. हर सनातनी इस बात से बेहद खुश था कि सदियों पुराना सपना अब साकार हो चुका है.
लेकिन इस गौरवमयी शुरुआत और 22 जून 2026 के बीच महज ढाई सालों का फासला है. इन ढाई वर्षों के भीतर अयोध्या से एक ऐसा खौफनाक सच सामने आया, जिसने देश-विदेश के करोड़ों रामभक्तों की अगाध श्रद्धा पर बेहद गहरी चोट की है. राम मंदिर के पवित्र प्रांगण में चढ़ावे की राशि पर डाका डालने वाले चंदा चोरों ने पूरे देश का सिर शर्म से झुका दिया है.
Ram Mandir Theft: 45 दिनों में 70 बार चोरी और 79 लाख की रिकवरी
इस महा-घोटाले का भंडाफोड़ तब हुआ जब विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी प्रारंभिक गोपनीय रिपोर्ट सरकार को सौंपी. इस जांच में यह शर्मनाक सच सामने आया कि केवल 45 दिनों के भीतर मंदिर के अंदर चढ़ावे की चोरी की 70 वारदातें सीसीटीवी कैमरों में साफ-साफ रिकॉर्ड हुई थीं. (Ram Mandir Theft) राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के तहत नोटों की गिनती करने और उसे बैंक भेजने की जिम्मेदारी संभालने वाले 8 कर्मचारियों को पुलिस ने रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया. पुलिस ने आधिकारिक तौर पर यह साफ कर दिया है कि इन चंदा चोरों के पास से अब तक 79 लाख रुपये की नकदी बरामद की जा चुकी है.
अखिलेश यादव का सोशल मीडिया पोस्ट
इस बेहद संवेदनशील मामले ने राजनीतिक रूप तब अख्तियार किया, जब बीते 7 जून को उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने राम मंदिर के भीतर हो रही इस नकदी चोरी को लेकर सोशल मीडिया पर पहली पोस्ट लिखी. इस खुलासे के बाद यह गंभीर मुद्दा पूरे देश की जुबान पर चढ़ गया. (Ram Mandir Theft) मामला सीधे तौर पर राम मंदिर ट्रस्ट की साख और विश्वसनीयता से जुड़ा था, जिसके चलते ट्रस्ट के सर्वेसर्वा महासचिव चंपत राय और वरिष्ठ सदस्य अनिल मिश्रा सीधे जनता के निशाने पर आ गए. चौतरफा दबाव और नैतिक जिम्मेदारी के चलते आखिरकार इन दोनों बड़े पदाधिकारियों को अपने पदों से इस्तीफा देना पड़ा.
जब टेंट में थे रामलला, तब 5 रुपये भी सुरक्षित था
अयोध्या को इतिहास में विरह की नगरी कहा जाता है, क्योंकि माता सीता के त्याग के बाद वे कभी लौटकर नहीं आईं. लेकिन आज के श्रद्धालुओं को सीता माता की विदाई से ज्यादा टीस इस बात की है कि उनके द्वारा भगवान के चरणों में अर्पित किए गए चंदे को इतनी बेरहमी से लूटा गया. (Ram Mandir Theft) जब रामलला एक छोटे से टेंट में विराजमान थे, तब देश के कोने-कोने और अवध के गांवों से आने वाले गरीब भक्त अपनी श्रद्धा से 2, 5, 10 या 50 रुपये दान पेटी में डालते थे.
उस दौर में न तो कोई आलीशान ट्रस्ट था और न ही बड़े-बड़े ट्रस्टी, फिर भी भक्तों का वह छोटा सा दान पूरी तरह सुरक्षित रहता था और कभी एक पैसे की हेराफेरी का आरोप नहीं लगा. (Ram Mandir Theft) उस समय प्रतिदिन केवल 10 से 15 हजार रुपये दान पात्र में जमा होते थे, लेकिन आज भव्य मंदिर बनने के बाद बिना किसी रसीद के हर दिन 10 से 12 लाख रुपये नकद आ रहे हैं. ऑनलाइन, चेक और क्यूआर कोड का चंदा तो इससे बिल्कुल अलग है.
दानपात्रों को अब शक की निगाहों से देख रहे हैं श्रद्धालु
इस भयंकर अविश्वास का असर अब जमीन पर दिखने लगा है. महाकुंभ के दौरान उमड़ी भारी भीड़ ने मंदिर में इतना गुप्त दान दिया था कि 24 घंटे काउंटिंग होने के बाद भी पैसे खत्म नहीं हो रहे थे. लेकिन इस चोरी के खुलासे के बाद, अयोध्या आने वाले भक्तों की तादाद तो कम नहीं हुई है, पर मंदिर के दानपात्रों में गिरने वाली नकद राशि में भारी गिरावट आई है. (Ram Mandir Theft) रामपथ, धर्मपथ और सरयू के किनारों पर भक्तों का हुजूम वैसे ही उमड़ रहा है, लेकिन अब श्रद्धालु मंदिर के भीतर रखे दानपात्रों को बेहद अविश्वास और शक की नजरों से देख रहे हैं.
लखनऊ से दिल्ली तक हिला संघ और BJP का सिंहासन राजनीति
याद करिए जब मंदिर निर्माण की बात शुरू हुई थी, तब ट्रस्ट और विश्व हिंदू परिषद ने देशव्यापी अभियान चलाकर साफ कहा था कि वे सरकार से एक भी पैसा नहीं लेंगे, बल्कि आम जनता के सहयोग से मंदिर बनाएंगे. लोगों ने भी आंखें बंद करके अपनी क्षमता के अनुसार खुलकर दान दिया, जिससे ट्रस्ट के पास अरबों की संपत्ति जमा हो गई.
लेकिन साल 2022 से ही जमीन खरीद विवादों में नाम आने और अब इस सीधी चंदा चोरी ने ट्रस्ट की साख को मिट्टी में मिला दिया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी इस बात का पूरी तरह अहसास है कि इस घटना ने न केवल भक्तों का दिल तोड़ा है, बल्कि लखनऊ से लेकर दिल्ली तक भाजपा सरकारों की साफ-सुथरी छवि को करारा झटका दिया है. (Ram Mandir Theft) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से लेकर विहिप तक इस खुलासे से पूरी तरह हिल गए हैं.
चेहरे तो बदल गए, लेकिन साख वापस लाना नामुमकिन
एसआईटी की कड़क जांच के बाद चंपत राय और अनिल मिश्रा ने अपने पदों से त्यागपत्र तो दे दिया है, लेकिन देश का आम जनमानस सिर्फ इतने भर से शांत होने वाला नहीं है. जनता के दिलों में बैठी अविश्वास की इस गहरी टीस को मिटाने के लिए सरकार को चंदे की एक-एक पाई का हिसाब सार्वजनिक करना होगा. (Ram Mandir Theft) जब तक इस पूरी साजिश के पीछे छिपे सफेदपोश और बड़े चेहरों को गिरेबान से पकड़कर सलाखों के पीछे नहीं भेजा जाता, तब तक रामभक्तों का खोया हुआ भरोसा वापस लाना कतई आसान नहीं होगा.







