रिपोर्ट – सुनील ठाकुर
Sonbhadra: सोनभद्र रेणुकूट नगर के गांधी मैदान में आयोजित संगीतमय श्री राम कथा के चतुर्थ दिवस पर कथा की अमृत वर्षा हुई। कथा व्यास नीलेश महाराज के मुखारबिंद से प्रवाहित राम कथा को सुनने के लिए हजारों की संख्या में मानस प्रेमी उपस्थित रहे।
आज की कथा में जगत के पालनहार श्रीराम का प्राकट्य, रामजी की बाल लीलाएं, निशाचरों द्वारा ऋषि-मुनियों को दिए गए कष्ट, विश्वामित्र का अयोध्या आगमन और यज्ञ की रक्षा हेतु राजा दशरथ से राम-लक्ष्मण को मांगने की कथा का विस्तार से वर्णन किया गया। (Sonbhadra) गुरु वशिष्ठ द्वारा समझाने पर राजा दशरथ का सहमत होना और आगे चलकर ताड़का वध तक की कथा का भावपूर्ण श्रवण कराया गया। कथा व्यास ने बताया कि धर्म की रक्षा हेतु ही प्रभु श्रीराम का अवतरण हुआ और उन्होंने मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में पितृ आज्ञा, गुरु आज्ञा और वरिष्ठजनों के सम्मान को अपने जीवन में उतारकर आदर्श प्रस्तुत किया।
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नीलेश महाराज ने कहा कि रामचरितमानस हमें नैतिकता, कर्तव्यनिष्ठा, मातृ-भक्ति, पितृ-भक्ति और गुरु-भक्ति का मार्ग सिखाती है। उन्होंने कहा—
“हरि अनंत हरि कथा अनंता। कहहि सुनहि बहु विधि सब संता॥”
अर्थात हरि अनंत हैं और उनकी कथा भी अनंत है। यदि हम श्रीराम के पदचिह्नों को अपने दैनिक जीवन में उतार लें तो मानव जीवन का निश्चित ही कल्याण हो सकता है।
कथा के दौरान नीलेश महाराज ने श्रोताओं से प्रश्न किया कि सवेरे उठकर कितने लोग अपने माता-पिता के पैर छूते हैं? हजारों की भीड़ में केवल चार-पांच लोगों के हाथ उठना आज के समाज के लिए एक प्रश्नचिह्न बन गया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि राम कथा, भागवत पुराण तभी फलदायी होते हैं जब हम उनके बताए मार्गों पर चलें। (Sonbhadra) रामचरितमानस के किसी भी पात्र के गुणों को अपनाने का प्रयास करने से ही जीवन सफल और सार्थक बनता है।
इस अवसर पर रेणुकूट, पिपरी, मुर्धवा, खाड़पाथर सहित आसपास के क्षेत्रों से आए हजारों श्रद्धालुओं ने कथा का श्रवण किया। राम प्रकाश त्रिपाठी के सान्निध्य में आयोजित श्री राम कथा में आज के यजमान श्याम शरण मिश्रा, सुमित सिंह, सतीश तिवारी, आरपी तिवारी, केके तिवारी, मंटू सोनी, मनोज सोनी, राजेश वर्मा, किशोर सोनी, पप्पू सोनी आदि ने मुख्य भूमिका निभाई।
वहीं अमरेश सिंह, उदय नाथ मौर्य, आर.डी. प्रसाद, राकेश सिंह, पवन सहित अन्य कार्यकर्ताओं ने व्यवस्थाओं और प्रसाद वितरण में सराहनीय योगदान दिया। (Sonbhadra) संगीतमय श्री राम कथा का यह चतुर्थ दिवस श्रद्धा, भक्ति और जीवन मूल्यों का संदेश देकर श्रद्धालुओं के लिए अविस्मरणीय बन गया।















