Supreme Court: कांग्रेस नेता राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता बहाली के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई याचिका खारिज कर दी गई है. याचिकाकर्ता लखनऊ के वकील अशोक पांडे ने याचिका में कहा था कि राहुल को सूरत की एक अदालत ने ‘मोदी सरनेम’ को लेकर की गई विवादित टिप्पणी के मामले में दोषी पाया था, जिसके चलते उनकी सदस्यता चली गई थी. (Supreme Court) हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल अगस्त में निचली अदालत के फैसले पर रोक लगा दिया, जिससे राहुल की सदस्यता फिर से बहाल हो गई.
सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता ने कोई ठोस आधार नहीं दिया है कि राहुल की सदस्यता बहाल करने का निर्णय गलत है. अदालत ने कहा कि निचली अदालत का फैसला अभी भी लंबित है और राहुल को दोषी ठहराने वाले फैसले को सुप्रीम कोर्ट अभी तक चुनौती नहीं दी गई है.

सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता अशोक पांडे पर एक लाख रुपये का हर्जाना भी लगाया है. (Supreme Court) अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता ने जानबूझकर याचिका दायर की थी और उसका उद्देश्य केवल राहुल गांधी को परेशान करना था.
याचिकाकर्ता अशोक पांडे ने कहा कि वह इस फैसले से नाखुश हैं और इसे चुनौती देंगे. उन्होंने कहा कि जब तक कोई ऊपर की अदालत में निर्दोष साबित न हो जाए, तब तक उसे सदन में वापस नहीं लिया जाना चाहिए.
राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता बहाली के फैसले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी शुरू हो गई है. (Supreme Court) कांग्रेस ने फैसले का स्वागत किया है और कहा है कि यह लोकतंत्र की जीत है. वहीं, भाजपा ने फैसले पर सवाल उठाया है और कहा है कि यह न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है.

Supreme Court: मानहानि मुकदमे की वजह क्या थी?
राहुल गांधी ने 13 अप्रैल, 2019 को कर्नाटक के कोलार में एक चुनावी रैली के दौरान कहा, ‘सभी चोरों के सरनेम मोदी ही क्यों होते हैं?’ राहुल के इस बयान पर काफी विवाद मचा और फिर गुजरात के पूर्व मंत्री पूर्णेश मोदी ने 2019 में आपराधिक मानहानि का मुकदमा दायर किया. (Supreme Court) कई सालों तक कानूनी कार्रवाई चलती रही. इसके बाद पिछले साल 23 मार्च को सूरत की एक अदालत ने राहुल को दोषी माना और उन्हें दो साल की सजा सुनाई.
नियमों के तहत अगले ही दिन राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता चली गई. इसके बाद कांग्रेस नेता ने अपनी दोषसिद्धि पर रोक लगाने के अनुरोध के साथ सूरत की अदालत के आदेश को सत्र अदालत में चुनौती दी. हालांकि, सत्र अदालत ने उन्हें 20 अप्रैल को जमानत दे दी और उनकी चुनौती पर सुनवाई करने पर सहमति व्यक्त की, लेकिन सजा पर रोक लगाने से इनकार कर दिया. इसके बाद राहुल गांधी 15 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट पहुंचे.









