प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते शुक्रवार बड़ा ऐलान करते हुए कृषि कानूनों को निरस्त करने की घोषणा की जिसके बाद आंदोलन कर रहे किसानों में खुशी की लहर है। इस बीच अब नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (सीएए) को भी वापस लेने की मांग उठने लगी है। प्रमुख मुस्लिम संगठन जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने पीए मोदी से सीएए को वापस लेने का आग्रह किया। उत्तर प्रदेश के अमरोहा से बसपा सांसद कुंवर दानिश अली ने भी सीएए को ‘बिना किसी देरी के’ निरस्त करने का आह्वान किया।
सांसद कुंवर दानिश अली ने शुक्रवार को ट्वीट करते हुए कहा, ‘तीन कृषि कानूनों को निरस्त करना एक स्वागत योग्य कदम है। मैं शक्तिशाली राज्य सत्ता और उनके साथी पूंजीवादी दोस्तों से लड़ने, बलिदान करने और कभी न हराने की उनकी इच्छा शक्ति के लिए किसानों को बधाई देता हूं। प्रधानमंत्री मोदी को सीएए पर भी पुनर्विचार करना चाहिए और बिना किसी देरी के इसको निरस्त करना चाहिए।’ जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने तीन कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा का स्वागत किया और किसानों की सराहना की।
अपने एक बयान में अरशद मदनी ने आरोप लगाया कि किसान आंदोलन को वैसे ही दबाने का हर संभव प्रयास किया गया जैसा देश में अन्य सभी आंदोलनों के साथ किया गया था। उन्होंने कहा कि किसानों को बांटने की साजिशें रची गईं, लेकिन वे हर तरह की कुर्बानी देते रहे और अपने फैसले पर अडिग रहे। मदनी ने दावा किया कि नागरिकता (संशोधन) अधिनियम के खिलाफ आंदोलन ने किसानों को कृषि कानूनों का विरोध करने के लिए प्रोत्साहित किया। मदनी ने यह भी मांग की कि कृषि कानूनों की तरह सीएए को भी वापस लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कृषि कानूनों को वापस लेने के फैसले ने दिखाता है कि लोकतंत्र और लोगों की शक्ति सर्वोपरि है। बता दें कि विवादित कानून सीएए को 12 दिसंबर, 2019 को अधिसूचित किया गया था और 10 जनवरी, 2020 से लागू हुआ था।









