बाराबंकी जेल के अधिकारी कैदियों पर खूब मेहरबान हैं। अधिकारी कैदियों के खान-पान की खूब ख्याल भी रख रहे हैं। इसीलिए मात्र तीन महीने में 3600 किलोग्राम यानि 36 कुतंल नींबू कैदियों को पिला डाला। जहां एक तरफ देशभर में नींबू के दाम आसमान छू रहे थे। वैसे अगर आंकड़ा लगाए को 40 किलो नींबू कैदियों के मात्र एक दिन में पिलाया गया। 36 कुंतल नींबू तब पिलाया गया, जब नींबू के दाम सबसे ऊपर थे। अब प्रश्न ये उठता है कि आखिर इतनी महंगाई में इतनी नींबू क्यों पिलाया गया। क्या कैदियों के खान-पान के लिए इतना बजट मिलता है।
दरअसल, इस मामले का खुलासा तब हुआ जब ये मामला बड़े अफसरों तक पहुंचा। जब बाराबंकी की जेल में नींबू घोटाले का खुलासा हुआ को दूसरे जिलों के अधिकारी भी जांच कराने लगे। फिलहाल इस मामले में डीजी जेल आनंद कुमार ने ये जांच डीआईजी संजीव त्रिपाठी को सौंप दिया है। मामले में अधिकारियों का कहना है कि डीआईजी संजीव त्रिपाठी की रिपोर्ट आने के बाद जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
आपको बता दे की नींबू के इल घोटाले पर जेल के अधिकारियों का कहना है कि कोरोना के चलते डॉक्टरों की सलाह पर प्रतिदिन कैदियों के नींबू दिया गया। जब बंदियों को नींबू पिलाय गया, उस समय पर नींबू की कीमत 150 से 200 रुपए में थी। यदि गणित लगाई जाए तो यहां कैदियों को हर दिन आठ हजार से अधिक का तो सिर्फ नींबू पिला दिया गया।
जिला कारागार में नींबू का घोटाला तो मात्र एक बानगी है। लेकिन यहां की कैंटीन में हर सामान में कीमत से अदिक उगाही होती है। कीमत से दो-तीन गुना अधिक ऊपर दामों में सामान की बिक्री होती है। रिहा हो चुके कैदियों ने जेल के अंदर चल रहे ऐसे खेलों का खुलासा किया। इस पर अधिकारियों का कहना है कि इस पर जेल के कर्मचारियों से लेकर अधिकारियों तक पूछताछ करेंगे।











