
Barabanki: बाराबंकी। शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, अवध प्रांत द्वारा हिंदी पखवाड़े के अवसर पर “हिंदी संवर्धन एवं पर्यावरण संरक्षण” विषयक एक विशेष कार्यशाला का आयोजन पंचायत भवन, ग्राम हमसेमऊ, सफेदाबाद (जनपद बाराबंकी) में किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्यार्थी, स्थानीय लोग एवं सामाजिक कार्यकर्ता सम्मिलित हुए।
कार्यक्रम का शुभारंभ संयोजक डॉ. कीर्ति विक्रम सिंह (पर्यावरण शिक्षा) ने किया। (Barabanki) उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि हिंदी केवल भाषा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और विचारधारा की आत्मा है। हिंदी के संरक्षण और संवर्धन के साथ-साथ पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
सह-संयोजक श्री के.वि. पंत ने हिंदी को जन-जन तक पहुँचाने के सामूहिक प्रयासों पर बल देते हुए कहा कि हिंदी की सरलता और सहजता उसे वैश्विक स्तर पर स्वीकार्यता दिला रही है।

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इस अवसर पर श्री संतोष कुमार (सचिन कराटे एसोसिएशन, उत्तर प्रदेश) तथा श्री कृष्ण अवतार (सचिव, कराटे एसोसिएशन, लखनऊ) ने युवाओं में अनुशासन, स्वास्थ्य और राष्ट्रीय मूल्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए किए जा रहे कार्यों की जानकारी साझा की।
पर्यावरण जलदूत श्री नंदकिशोर शर्मा ने अपने वक्तव्य में कहा कि पर्यावरण संरक्षण को जीवन शैली का हिस्सा बनाना आवश्यक है। (Barabanki) वृक्षारोपण केवल एक गतिविधि नहीं, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के प्रति हमारी जिम्मेदारी है।
सामाजिक कार्यकर्ता एवं सह-संयोजक बाराबंकी श्री शिवकुमार ने ग्रामीण समाज को हिंदी एवं पर्यावरणीय आंदोलनों से जोड़ने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया।
कार्यक्रम के अंतर्गत हस्ताक्षर अभियान आयोजित कर सभी प्रतिभागियों से हिंदी संवर्धन एवं पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया गया। (Barabanki) साथ ही परिसर में वृक्षारोपण कर हरियाली और स्वच्छ वातावरण का संदेश दिया गया। कार्यशाला का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।









