Iran Tensions: भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच कूटनीतिक सक्रियता दिखाते हुए कई अहम नेताओं से बातचीत की। उन्होंने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान बिन जसीम अल थानी से फोन पर चर्चा की। हालांकि, इन बातचीतों का विस्तृत ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया गया, लेकिन माना जा रहा है कि क्षेत्रीय तनाव और ऊर्जा आपूर्ति जैसे मुद्दे प्रमुख रहे।
यह कूटनीतिक संपर्क ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने के लिए 48 घंटे की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा है कि यदि यह महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग नहीं खोला गया, तो ईरान के बिजली संयंत्रों और पुलों पर हमले किए जा सकते हैं। (Iran Tensions) इस चेतावनी के बाद पूरे पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ गया है। जयशंकर ने संयुक्त अरब अमीरात के विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान से भी बातचीत की। माना जा रहा है कि इन चर्चाओं में वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और उसके संभावित संकट पर विशेष ध्यान दिया गया। उन्होंने सोशल मीडिया पर संक्षिप्त जानकारी साझा करते हुए कहा कि सभी नेताओं के साथ मौजूदा स्थिति और बदलते क्षेत्रीय हालात पर विचार-विमर्श हुआ।
नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास के अनुसार, भारत और ईरान के बीच द्विपक्षीय संबंधों के अलावा क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर भी चर्चा हुई। यह संवाद इस बात का संकेत है कि भारत इस संकट को कूटनीतिक तरीके से सुलझाने की दिशा में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। (Iran Tensions) स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, जो फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति के लिए बेहद अहम है। इसके अवरुद्ध होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल और गैस की कीमतों में तेज उछाल देखा गया है। (Iran Tensions) पश्चिम एशिया भारत के लिए ऊर्जा का एक बड़ा स्रोत है, ऐसे में यह संकट भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है। भारत ने हाल के हफ्तों में इस क्षेत्र में शांति बहाल करने और ऊर्जा आपूर्ति को सुचारु बनाए रखने के लिए लगातार कूटनीतिक प्रयास किए हैं। यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो भारत समेत कई देशों की ईंधन और उर्वरक सुरक्षा पर व्यापक असर पड़ सकता है।















