UP Assembly Special Session: यूपी में महिला आरक्षण पर महा-संग्राम! योगी सरकार ने 30 अप्रैल को बुलाया विशेष सत्र, विपक्ष में खलबली

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UP Assembly Special Session: महिला आरक्षण बिल को लेकर राजनीतिक माहौल लगातार गरमाता जा रहा है। इसी बीच उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने इस मुद्दे पर बड़ा कदम उठाते हुए 30 अप्रैल को विधानमंडल का विशेष सत्र बुलाने का फैसला किया है। रविवार को कैबिनेट बाई सर्कुलेशन के जरिए इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई, जिसे अब आनंदी बेन पटेल के पास अंतिम स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा।

इस विशेष सत्र का मुख्य उद्देश्य महिला आरक्षण बिल के समर्थन में प्रस्ताव पारित करना और विपक्षी दलों के रुख पर सवाल खड़े करना है। (UP Assembly Special Session) सरकार इस मंच के जरिए अपनी स्पष्ट स्थिति रखेगी और यह बताने की कोशिश करेगी कि वह महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर कितनी गंभीर है। साथ ही, विपक्ष के व्यवहार को लेकर निंदा प्रस्ताव लाने की भी चर्चा तेज हो गई है।

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दरअसल, लोकसभा में महिला आरक्षण संशोधन बिल पारित न होने के बाद से भारतीय जनता पार्टी विपक्ष के खिलाफ आक्रामक रणनीति अपना रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इस मुद्दे पर विपक्षी दलों की तीखी आलोचना की है। (UP Assembly Special Session) उन्होंने सदन में हुए घटनाक्रम की तुलना महाभारत के ‘द्रौपदी चीरहरण’ जैसे प्रसंग से करते हुए कहा कि विपक्ष का आचरण बेहद गैर-जिम्मेदाराना और अनुचित रहा है।

UP Assembly Special Session: विशेष सत्र के हंगामेदार रहने की संभावना

सीएम योगी के अनुसार, INDI गठबंधन के तहत आने वाले दलों कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, टीएमसी और डीएमके का व्यवहार लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ था। उन्होंने आरोप लगाया कि सदन में की गई टिप्पणियां और आचरण किसी से छिपा नहीं है और यह महिला सम्मान के खिलाफ है। वहीं दूसरी ओर समाजवादी पार्टी भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की तैयारी में है। सपा की ओर से यह तर्क दिया जा सकता है कि महिला आरक्षण में पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) वर्ग की महिलाओं के लिए अलग से प्रावधान होना चाहिए।

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साथ ही, परिसीमन के जरिए लोकतंत्र को प्रभावित करने के आरोप भी लगाए जा सकते हैं। 30 अप्रैल को होने वाला यह विशेष सत्र काफी हंगामेदार रहने की संभावना है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस, आरोप-प्रत्यारोप और राजनीतिक टकराव देखने को मिल सकता है। यह सत्र न केवल महिला आरक्षण के मुद्दे पर, बल्कि प्रदेश की राजनीति की दिशा तय करने में भी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

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