अंबेडकरनगर : जेल में मोबाइल चलाने वाले बंदियों की अब खैर नहीं

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अंबेडकरनगर : जेल के अंदर प्रतिबंधित मोबाइल इंटरनेट अथवा अन्य किसी तरह की डिवाइस के प्रयोग को लेकर कानून कड़े किए गए है। इसे लेकर अब 3 से 5 साल तक की सजा व 20 हजार से लेकर 50 हजार तक का जुर्माना भी भरना होगा। ऐसे में अब उन बंदियों की मुश्किलें बढ़ेगी, जो जल से अवैध रूप से मोबाइल फोन का प्रयोग कर लेते थे। प्रदेश की जेलों में मोबाइल को लेकर आए दिन जो सवाल उठते थे, अब इस नई व्यवस्था से इस पर काफी हद तक लगाम लगने की उम्मीद है। ज्ञातव्य हो कि जेल अधीक्षक श्रीमती मिश्रा की तैनाती के पूर्व नवनिर्मित इस कारागार पर बदी बड़े आराम से मोबाइल्स का उपयोग करते आ रहे थे। जिस पर सघन तलाशी अभियान चलाकर उन्होंने कारागार को मोबाइल विहीन करने में अपनी पूरी ताकत झोंक दी। जेल में अब बेतार संचार साधन जैसे मोबाइल, टैबलेट, पामटॉप, लैपटॉप या अन्य किसी भी तरह की डिवाइस का प्रयोग पूर्णतः प्रतिबंधित है।

नए जेल एक्ट के बारे में बंदी किए जा रहे जागरूक

जेल अधीक्षक हर्षिता मिश्रा ने बताया कि जेल एक्ट में जो संशोधन लागू हुए हैं, अब उसको लेकर बंदियों को जानकारी दी जा रही है, जिससे कि वह संज्ञेय अपराध की ओर न बढ़ सकें। बंदियों को इस बारे में अच्छे ढंग से समझाया जा रहा है। इसके अलावा जेल की बैरेक्स पर भी नजर रखी जा रही है। समय-समय पर बैरकों की सघन तलाशी कराई जाती है, जिससे कारागार की व्यवस्था चुस्त दुरुस्त एवं सुदृढ बनी रहे।कारागार अधिनियम में संशोधन करते हुए अब जेल के अंदर बंदियों द्वारा मोबाइल प्रचालन पर उनके खिलाफ कठोर कार्यवाही की जाएगी। उनके विरूद्ध वाद पंजीकृत कराया जाएगा। नवीन प्राविधानों में ऐसे मामलों में दोष सिद्ध हो जाने पर बंदी को 3-5 वर्ष तक की सज़ा व 20 से 50 हजार तक का अर्थदंड भी भरना होगा। नए प्राविधान में अब यह संज्ञेय अपराध की श्रेणी में रखा गया है।

रिपोर्ट :अंजलि गोस्वामी 

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