यूपी खोने का डर था बीजेपी को ,विधायक पर फेंकी कालिख , शीशे तोड़े.

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कृषि कानूनों को वापस लेने के ऐलान से पहले ये जानना जरूरी है कि वेस्ट यूपी में भाजपा के सामने क्या दिक्कते हैं? यहां की 130 में 104 सीटें अभी भाजपा के पास है लेकिन किसान आंदोलन के बाद भाजपा नेता ग्रामीण क्षेत्रों में जाने से भी डर रहे थे। 14 अगस्त 2021 को मुजफ्फरनगर में भाजपा विधायक उमेश मलिक के काफिले पर किसानों ने कालिख फेंक दी थी। मेरठ में भाजपा विधायक जितेंद्र सतवाई, भाजपा विधायक सत्यवीर त्यागी पर पत्थर फेंके गए थे। बागपत, बुलंदशहर और हापुड़ में भी भाजपा नेताओं को विरोध झेलना पड़ा। भाजपा विधायक के पक्ष में केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान को भी थाने पहुंचना पड़ा था।

कानून वापसी के फैसलों का असर 130 सीटों पर होगा। वेस्ट यूपी की ये सभी सीटें किसान बाहुल्य हैं। यहां ज्यादातर जाट, गुर्जर और मुस्लिम किसानी करते हैं। यही यहां की राजनीति की दिशा तय करते हैं। किसान आंदोलन के दौरान ये किसान भाजपा से किनारा कर गए थे। भाजपा इनकी नाराजगी दूर करके यहां फिर मुकाबले में खड़ी हो गई है।

केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. संजीव बालियान विधायक उमेश मलिक पर हुए हमले के बाद भौराकलां थाने पहुंचे थे। उन्होंने डीएम और एसएसपी को तल्ख अंदाज में कहा था कि कार्रवाई कर लो या बीच से हट जाओ। साथ ही हमला करने वालों को निशाने पर लेते हुए कहा कि हमारी संवैधानिक मजबूरी को कमजोरी न समझे, हमारी रगो में भी वही खून है जो उनमें है। इलाका भी वही है, संभाल लें अपने आपको।

लखीमपुर हिंसा के बाद भाजपा नेताओं को यह ताकीद दे दी गई थी कि वे किसान आंदोलन पर कोई प्रतिक्रिया जाहिर न करें। इसके बाद तो नेताओं ने कार्यक्रमों में जाना ही छोड़ दिया था। भाजपा नेताओं का विरोध करने में भारतीय किसान यूनियन के कार्यकर्ता सबसे अधिक आगे रहे।

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