इलाहाबाद HC ने मोदी सरकार से समान नागरिक संहिता पर विचार करने को कहा

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इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार से अनुच्छेद 44 के जनादेश को लागू करने का आह्वान किया है, जिसमें कहा गया है कि “राज्य नागरिकों के लिए भारत के पूरे क्षेत्र में एक समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को सुरक्षित करने का प्रयास करेगा।” अंतरधार्मिक विवाह से संबंधित 17 याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति सुनीत कुमार की पीठ ने कहा कि यूसीसी का मुद्दा, हालांकि संवैधानिक है, जब भी सार्वजनिक डोमेन में उठाया या बहस की जाती है, तो राजनीतिक उलटफेर होता है। उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने विवाह और पारिवारिक कानूनों की बहुलता के मद्देनजर समान नागरिक संहिता को लागू करने का आह्वान किया।

न्यायमूर्ति सुनीत कुमार ने कहा कि यह समय की मांग है कि संसद एक “एकल परिवार संहिता” के साथ अंतरधार्मिक जोड़ों को “अपराधियों के रूप में शिकार” होने से बचाने के लिए आए। अदालत ने कहा, “अब यह स्थिति आ गई है कि संसद को हस्तक्षेप करना चाहिए और इस बात की जांच करनी चाहिए कि क्या देश को विवाह और पंजीकरण कानूनों की बहुलता की आवश्यकता है या विवाह के पक्षों को एकल परिवार संहिता की छत्रछाया में लाया जाना चाहिए।”

पीठ ने आगे जोर देकर कहा कि अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्यों द्वारा व्यक्त की गई आशंका और भय को देखते हुए यह स्वैच्छिक नहीं हो सकता। अदालत ने कहा, “यूसीसी आज एक आवश्यकता है और अनिवार्य रूप से आवश्यक है। इसे ‘विशुद्ध रूप से स्वैच्छिक’ नहीं बनाया जा सकता है, जैसा कि 75 साल पहले बीआर अंबेडकर ने अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्यों द्वारा व्यक्त की गई आशंका और भय के मद्देनजर देखा था।”

उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश हुए स्थायी वकील ने कहा कि याचिकाकतार्ओं की शादी को जिला प्राधिकरण द्वारा जांच के बिना पंजीकृत नहीं किया जा सकता है। हालांकि, याचिकाकतार्ओं के वकील ने जोर देकर कहा कि नागरिकों को अपने साथी को चुनने का अधिकार है, और धर्म परिवर्तन स्वतंत्र इच्छा से हुआ है।

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