बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने फर्जी मोटर बीमा दावे दायर करने वाले यूपी के 28 वकीलों कदाचार के आरोप में सस्पेंड कर दिया है। घोटाले के खुलासे के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एसआईटी को जांच सौंपी थी, जिससे बीमा कंपनियों को 300 करोड़ रुपए से अधिक की चपत लगने से बच गई। बार काउंसिल ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर वकीलों का निलंबन किया है।
वकीलों के नाम प्रदेश बार काउंसिल को भेजकर अनुशासनात्मक कार्रवाई के साथ तीन महीने में जांच करने और रिपोर्ट बीसीआई को भेजने के भी निर्देश हैं। सभी मामलों की सुनवाई पूरी होने तक निलंबित रहेंगे।
सुप्रीम कोर्ट में पांच अक्टूबर को सुनवाई के दौरान जस्टिस एमआर शाह व जस्टिस संजीव खन्ना की पीठ ने पाया था कि एसआईटी ने यूपी के जिलों में जो 92 मामले दर्ज किए हैं, उनमें से 55 में 28 वकीलों के नाम शामिल हैं। इनमें से 32 मामलों की जांच पूरी हो चुकी है, कोर्ट में आरोपपत्र भी दाखिल किए जा चुके हैं। पीठ ने सुनवाई के दौरान वकीलों पर कार्रवाई न होने पर गहरी नाराजगी भी जताई थी।
एसआईटी उत्तर प्रदेश में फर्जी मोटर बीमा दावा दायर करने के फर्जीवाड़े की जांच 6 साल से कर रही है। यह मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट में साल 2015 में सामने आया। विभिन्न बीमा कंपनियों ने अलग-अलग अदालतों में फर्जी बीमा दावे का आरोप लगाते हुए मामले दर्ज किए थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने सात अक्तूबर 2015 को प्रदेश सरकार से एसआईटी गठित कर जांच करवाने के आदेश दिए थे। एसआईटी गठन के बाद 1376 संदिग्ध दावों की शिकायत आई। अबतक महज 250 की जांच पूरी हो पाई है। मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण एवं कामगार मुआवजा कानून के तहत बीमा कंपनियों व अलग-अलग अधिकरणों ने कुल 233 दावों को संदिग्ध या फर्जी पाते हुए 300 करोड़ रुपए से अधिक के दावे खारिज किए।









