पहाड़ों पर हो रही बर्फबारी से वाराणसी समेत आसपास के जिलों के मौसम का मिजाज बदल गया। सोमवार सुबह हल्के कोहरे के बाद धूप निकली। जिसके बाद बादलों की आवाजाही शुरू हो गई।
पिछले कुछ दिनों से तापमान में बढ़ोतरी हुई लेकिन मौसम विभाग के अनुसार इस हफ्ते में पारा गिरेगा। जिसकी वजह से ठंड भी बढ़ने वाली है. दूसरी तरफ प्रदूषण के स्तर में भी बहुत सुधार नहीं है और इस हफ्ते भी आज के आसपास ही एक्यूआई रहने का अनुमान है। सोमवार सुबह वाराणसी के ग्रामीण इलाकों में कोहरा नजर आया।
इधर, शाम को गलन और ठिठुरन ने लोगों को अलाव जलाने को मजबूर कर दिया है। रविवार को अधिकतम तापमान 24.6 डिग्री सेल्सियस रहा जबकि न्यूनतम तापमान करीब 10 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विभाग के अनुसार, सोमवार को बादल छाए रहेंगे। अधिकतम तापमान 25 डिग्री और न्यूनतम 14 डिग्री तक पहुंच सकता है।
रविवार की तरह सोमवार सुबह भी वाराणसी हर से सटे इलाकों में कई जगहों पर कोहरा भी छाया रहा। धूप तो निकली लेकिन पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता की वजह से उसका असर कम रहा। पिछले दो दिनों से तापमान करीब-करीब स्थिर है। लेकिन एक दो दिन में बूंदाबांदी के कारण पारा गोता लगाएगा। मौसम वैज्ञानिक के अनुसार आने वाले बादलों की आवाजाही जारी रहने और हल्की बूंदाबांदी के भी आसार बन रहे हैं।
पिछले सप्ताह अधिकतम तापमान 20 डिग्री सेल्सियस के नीचे आ गया था जबकि न्यूनतम तापमान 5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था। बीएचयू के मौसम वैज्ञानिक प्रो. मनोज श्रीवास्तव ने बताया कि जम्मू कश्मीर से पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने की वजह से ही मौसम में बदलाव हुआ है। 27-28 दिसंबर को वाराणसी समेत आसपास के इलाकों में कुछ जगहों पर बादल छाए रहने, बूंदाबांदी की संभावना है।
मिर्जापुर में सोमवार सुबह कोहरे के चलते दॄश्यता न के बराबर थी। ऐसे में वाहनों की रफ्तार थम गई। ट्रेनों के आवागमन पर भी इसका असर दिखा। लोग ठंड से परेशान नजर आए। चट्टी चौराहों पर लोग जुगाड़ के अलाव के आस पास बैठे दिखे। सड़कों पर भी न के बराबर लोग दिखे। पशु पक्षी भी कोहरा भरे मौसम से जूझते रहे। आम जन जीवन पर इसका व्यापक असर पड़ा।
मौसम में उतार-चढ़ाव से किसानों की चिंता बढ़ी
पिछले कई दिनों से मौसम में रुक रुक कर बदलाव होने से फसलों को लेकर किसान परेशान हैं। आसमान में हल्के बादल होने से सरसो की फसल पर माहू लगने की संभावना को लेकर भी किसान सकते में हैं। किसानों का मानना है कि अगर हल्की बारिश हुई तो फसलों को लाभ होगा।
पिछले तीन-चार दिनों से मौसम में उतार-चढ़ाव की स्थिति बनी हुई है। कभी हल्का कोहरा तो कभी धुंध हो जा रहा है। ठंड में भी उतार-चढ़ाव बना हुआ है। इसके साथ ही कभी आसमान में हल्के बादल भी छा जाते हैं। इसके चलते किसानों की चिंता बढ़ गई है। किसानों की मानें तो आसमान में बार-बार बादल छाने के कारण तिलहनी खासकर सरसो की फसल पर माहो लगने की संभावना बढ़ जाती है।
किसानों का कहना है कि इस वर्ष अधिकांश इलाकों में रबी की बोआई विलंब से हुई है और सरसों अभी फूल ले रहे हैं। ऐसे में अगर माहू का प्रकोप हुआ तो सरसो की पैदावार प्रभावित होगी। इसके अलावा दलहनी फसलों की बोआई के बाद से मौसम रुखा बना हुआ है। इसके चलते दलहनी फसलों का भी भरपूर विकास नहीं हो रहा है।









