जौनपुर : शाहगंज नगर और आसपास में क्षेत्रो में इन दिनों फर्जी और कथित पत्रकारों की बाढ़ सी आगयीं है।जिससे पत्रकारिता जैसे ।मिशन पर दाग लग रहा है।कुछ तो ऐसे भी मिल जाएंगी जिनको लिखने पढ़ने एक भी अक्षर नही आता या यूं समझ लीजिए काला अक्षर भैंस बराबर ऐसे भी लोग अक्सर थाना, अस्पताल, रेलवे स्टेशन, तहसील और अन्य क्षेत्रों में घूमते और मोबाइल से फोटो खींचते नज़र आजायेंगे।पूर्व वरिष्ठ पत्रकार विक्रम सिंह विक्की बताते हैं की क्षेत्र में अक्सर कुछ लोगों को गले मे प्रेस का कार्ड और फर्जी माइक लिए घूमते रहते हैं।जिन्हें पत्रकारिता जैसे पवित्र पेशे से कुछ लेना देना नही होता।ये भोली भाली जनता को बेवकूफ और कुछ सरकारी कर्मचारियों के सांठ गांठ से अवैध वसूली मे लिप्त रहते हैं। कुछ तो ऐसे भी हैं जो अपने वाहनों पर प्रेस लिखवाकर धड़ल्ले से चलते है जिनका पत्रकारिता से कोई लेना देना नही रहता है।
वरिष्ठ पत्रकार विनोद साहू कहते हैँ की कुछ लोग फर्जी प्रेस कार्ड बनाकर सौ दो सौ रुपये में बेचते हैं।और फर्जी प्रेस कार्डो के आड़ में कथित पत्रकार अवैध कामों में लगे रहते हैं।कुछ प्रेस कार्डो को देखा गया है की जिसका न तो कोई अखबार होता है और न ही कोई चैनल। दैनिक भास्कर के पत्रकार नौशाद मंसूरी कहते हैं।ऐसे कथित पत्रकारों के कारण पत्रकारिता के मिशन को आगे बढाने वाले पत्रकारों की छवि धूमिल होती है। पत्रकार चंदन जायसवाल बताते है शासन प्रशासन के उदासीन रवय्ये के कारण कथित पत्रकारों का मनोबल बढ़ गया है।ऐसे फर्जी पत्रकारों पर लगाम लगना बहुत आवश्यक है।जिससे पत्रकारिता की पवित्रता बनी रहे।
रिपोर्ट: पठान अली









