Varanasi News : वाराणसी में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां पर दो बेटियां एक साल पहले मर चुकी अपनी मां के कंकाल के साथ रह रही थीं। उन्होंने सबसे रिश्ते तोड़ रखे थे और इस वजह से रिश्तेदारों और पड़ोसियों को भी इतने लंबे समय तक इस मामले की जानकारी नहीं हो सकी। बाद में शक होने पर एक पड़ोसी ने लखनऊ में रह रहे इन युवतियों के नाना को फोन पर जानकारी दी।
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Varanasi News : पिछले साल दिसंबर में हुआ था माँ का निधन
पल्लवी और वैष्णवी के नाना रामकृष्ण पांडेय ने बनारस में घर के पास ही कॉस्मेटिक की दुकान खोली थी मगर पल्लवी का व्यवहार ठीक न होने के कारण लगभग डेढ़ साल पहले वे लखनऊ में अपनी छोटी बेटी उपासना के घर जाकर रहने लगे। दुकान की जिम्मेदारी पल्लवी ने संभाल ली थी मगर वह दुकान को नहीं चला सकी। इस बीच 8 दिसंबर 2022 को ऊषा का निधन हो गया। करीब दो महीने पूर्व रामकृष्ण वाराणसी आए थे मगर पल्लवी ने उन्हें घर में नहीं घुसने दिया था। इस पर रामकृष्ण ने पड़ोसी रमेश सिंह को अपना नंबर दिया था ताकि जरूरत पड़ने पर उनसे संपर्क किया जा सके।

पल्लवी और वैष्णवी ने रिश्तेदारों के साथ ही पड़ोसी लोगों से भी रिश्ते तोड़ रखे थे। प्रधानमंत्री अन्न योजना और मां के जेवरात बेचने से मिले पैसों से दोनों का खर्च चल रहा था। यह पैसे भी खत्म हो जाने पर 27 वर्षीय पल्लवी और 17 वर्षीय वैष्णवी ने तीन-चार दिनों से पड़ोसियों से खाना मांगना शुरू कर दिया था। इस पर पड़ोसी रमेश ने रामकृष्ण को फोन करके पल्लवी और वैष्णवी की स्थिति के बारे में जानकारी दी। जानकारी मिलने के बाद रामकृष्ण पांडेय ने मिर्जापुर के जलालपुर में रहने वाली अपनी मझली बेटी सीमा चतुर्वेदी को वाराणसी भेजा। सीमा घर पर पहुंची तो पल्लवी और वैष्णवी ने दरवाजा खोलने से इनकार कर दिया।

दोनों के इस रवैए पर सीमा चतुर्वेदी ने लंका थाने को पूरे मामले की जानकारी दी। लंका थाने के इंस्पेक्टर शिवाकांत मिश्रा जब पुलिस फोर्स लेकर घर पर पहुंचे तो भी दोनों युवतियों ने दरवाजा नहीं खोला। पुलिस ने जबरदस्ती दरवाजा खुलवाया तो अंदर का दृश्य देखकर हर कोई हैरान रह गया। दोनों युवतियां अपनी मां ऊषा के शव के कंकाल के साथ रह रही थीं। ऊषा के शव का कंकाल एक कमरे में पलंग पर सफेद रंग की रजाई से ढका हुआ था।
Varanasi News : दोनों बहनें मानसिक बीमारी से ग्रस्त
इस बाबत पूछताछ करने पर पल्लवी का कहना था की मां के निधन की सूचना उन्होंने डर के मारे किसी को नहीं दी थी। दोनों बहनें घर के दूसरे कमरे में रह रही थीं। पूरे मामले का खुलासा होने के बाद पुलिस ने घर को सील करके दोनों युवतियों को पड़ोसी के घर रख दिया है। काशी जोन के डीसीपी आरएस गौतम का कहना है कि दोनों बहनें मानसिक बीमारी से ग्रस्त लग रही हैं। ऊषा के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। रिपोर्ट आने के बाद पुलिस आगे कोई कदम बढ़ाएगी।

यह मामला बेहद चौंकाने वाला है। दो बेटियां अपनी मां के कंकाल के साथ एक साल तक कैसे रह सकती हैं? इस सवाल का जवाब मानसिक बीमारी में ही छिपा है। दोनों बहनों को मानसिक बीमारी का इलाज कराना जरूरी है। इसके अलावा, इस मामले में रिश्तेदारों की भी भूमिका की जांच होनी चाहिए। उन्हें अपनी रिश्तेदारों की स्थिति को लेकर ज्यादा जागरूक रहना चाहिए और समय रहते उन्हें मदद की पेशकश करनी चाहिए। इस मामले से एक सबक यह भी मिलता है कि मानसिक बीमारी एक गंभीर बीमारी है। इसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। इसके लक्षण दिखते ही तुरंत इलाज शुरू करना चाहिए।










