New Criminal Law Bills: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आज लोकसभा में भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम के तीन बिलों पर बहस का जवाब दिया। इन बिलों को संसद के मानसून सत्र में पेश किया गया था और अब उन्हें लोकसभा में पारित करने की तैयारी है।
अमित शाह ने कहा कि इन तीनों बिलों से गुलामी की मानसिकता से मुक्त कराया गया है। (New Criminal Law Bills) इसमें न्याय, समानता और निष्पक्षता को सामाहित किया गया है। उन्होंने कहा कि ये बिल भारत को एक आधुनिक और प्रगतिशील देश बनाने में मदद करेंगे। अमित शाह ने कहा कि भारतीय न्याय संहिता 1860 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम 1872 को अंग्रेजों के शासनकाल में बनाया गया था। ये कानून आज की जरूरतों को पूरा नहीं करते हैं। उन्होंने कहा कि इन बिलों में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं।

उन्होंने कहा कि भारतीय न्याय संहिता में महिलाओं और बच्चों के अधिकारों को मजबूत किया गया है। (New Criminal Law Bills) इसमें दहेज हत्या, घरेलू हिंसा और बाल यौन शोषण जैसे अपराधों के लिए कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि भारतीय साक्ष्य अधिनियम में भी कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। इसमें गवाहों के बयानों को अधिक विश्वसनीय बनाने के लिए प्रावधान किए गए हैं।
अमित शाह ने कहा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता एक नया कानून है। (New Criminal Law Bills) इसमें नागरिकों के अधिकारों और कर्तव्यों को परिभाषित किया गया है। उन्होंने कहा कि यह कानून नागरिकों को उनके अधिकारों के बारे में जागरूक करेगा और उन्हें अपने कर्तव्यों का पालन करने के लिए प्रेरित करेगा। इन बिलों को लेकर विपक्षी दलों ने कई सवाल उठाए हैं। कांग्रेस ने कहा है कि इन बिलों से लोकतंत्र को खतरा है। उन्होंने कहा कि इन बिलों से सरकार को लोगों पर अधिक नियंत्रण मिलेगा। हालांकि, सरकार ने इन आरोपों को खारिज किया है। सरकार ने कहा है कि ये बिल लोकतंत्र को मजबूत करने में मदद करेंगे।

New Criminal Law Bills: पुलिस और नागरिक अधिकारों के बीच किया गया संतुलन
उन्होंने कहा किपुलिस और नागरिक के अधिकारों के बीच संतुलन किया गया है. (New Criminal Law Bills) इससे सजा करने का प्रतिशत बढ़ेगा. साइबर क्राइम का भी बहुत प्रावधान किए हैं. तीनों कानून 150 सालों के बाद बदले जा रहे हैं. इन कानूनों के आधार पर इस देश की अपराधिक प्रणाली चलनी है. न्याय, समानता और निष्पक्षता को समाहित किया गया है. फॉरेंसिक साइंस को समाहित किया गया है. इन कानूनों के माध्यम से जल्दी मिले.
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (CRPC) में पहले 484 धाराएं थीं, अब 531 होंगी, 177 धाराओं में बदलाव हुआ है. 9 नई धाराएं जोड़ी गई हैं, 39 नए सब सेक्शन जोड़े गए हैं. 44 नए प्रोविजन और स्पष्टीकरण जोड़े गए हैं. 35 सेक्शन में टाइम लाइन जोड़ी हैं और 14 धाराओं को हटा दिया गया है.









