Badrinath Ji Ki Aarti Lyrics: श्री बद्रीनाथ धाम, उत्तराखंड में स्थित चार धामों में से एक प्रमुख धाम हैं। यह भगवान विष्णु के बद्रीनाथ रूप को समर्पित है, यहाँ पर भक्तों के द्वारा इस पावन आरती का गायन किया जाता है। जिससे भगवान विष्णु (बद्रीनाथ जी) अपने भक्तों की समस्त मनोकामनाओं की पूर्ति करते हैं। हिन्दू धर्म में ऐसी मान्यता है की सभी को चार धामों की यात्रा आवश्य ही करनी चाहिए। इस जेनेरेशन से पहले वाली सभी पीढ़ियाँ अपने जीवन में एक बार चार धामों की यात्रा अवश्य ही करता था।
श्री बद्रीनाथ जी की आरती
पवन मंद सुगंध शीतल, हेम मंदिर शोभितम्
निकट गंगा बहत निर्मल, श्री बद्रीनाथ विश्वम्भरम्।
शेष सुमिरन करत निशदिन, धरत ध्यान महेश्वरम् ,
वेद ब्रह्मा करत स्तुति, श्री बद्रीनाथ विश्वम्भरम्॥
पवन मंद सुगंध शीतल…
शक्ति गौरी गणेश शारद, नारद मुनि उच्चारणम् ,
जोग ध्यान अपार लीला, श्री बद्रीनाथ विश्वम्भरम्॥
पवन मंद सुगंध शीतल…
इंद्र चंद्र कुबेर धुनि कर, धूप दीप प्रकाशितम् ,
सिद्ध मुनिजन करत जय जय, श्री बद्रीनाथ विश्वम्भरम्॥
पवन मंद सुगंध शीतल…
यक्ष किन्नर करत कौतुक, ज्ञान गंधर्व प्रकाशितम् ,
श्री लक्ष्मी कमला चंवरडोल, श्री बद्रीनाथ विश्वम्भरम्॥
पवन मंद सुगंध शीतल…
कैलाश में एक देव निरंजन, शैल शिखर महेश्वरम् ,
राजयुधिष्ठिर करत स्तुति, श्री बद्रीनाथ विश्वम्भरम्॥
पवन मंद सुगंध शीतल…
श्री बद्रजी के पंच रत्न, पढ्त पाप विनाशनम् ,
कोटि तीर्थ भवेत पुण्य, प्राप्यते फलदायकम्॥
पवन मंद सुगंध शीतल…
पवन मंद सुगंध शीतल, हेम मंदिर शोभितम्
निकट गंगा बहत निर्मल, श्री बद्रीनाथ विश्वम्भरम्।
इसे भी पढ़ें–















