Assam CM Viral Post : यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ के बाद सबसे अधिक खबरों में रहने वाले भाजपाई मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा विपक्ष पर अपने तीखे प्रहार के लिए जाने जाते हैं। हाल ही में संपन्न हुए पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में पार्टी के सबसे लोकप्रिय स्टार प्रचारकों में रहे। इन दिनों असम सीएम अपने बयान के बजाए एक सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर खबरों में है। उनके पोस्ट पर जमकर बवाल हुआ और विपक्षी नेताओं ने उन्हें घेरना शुरू कर दिया।
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मामला तूल पकड़ता देख सीएम सरमा ने विवादित पोस्ट को डिलीट करते हुए सार्वजनिक माफी मांगी। दरअसल, ये पूरा मामला गीता के एक श्लोक का गलत अनुवाद को लेकर है, जिसमें कथित रूप से वर्ण व्यवस्था को सही ठहराने की कोशिश की गई है। पोस्ट के वायरल होते ही विपक्षी नेताओं ने उन पर हमले शुरू कर दिए और सरमा पर जाति विभाजन को बढ़ावा देने का आरोप लगाया।

बताया जाता है कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के जिस सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर सियासी बवाल मचा, उसमें गलत तरीके से जातियों की व्याख्या की गई थी। शूद्रों को लेकर गलत टिप्पणी की गई थी और उन्हें समाज के दोयम दर्जे के नागरिक के रूप में दर्शाया गया था। इस पोस्ट पर सोशल मीडिया में भी लोगों के बीच बहस छिड़ गई थी।
Assam CM Viral Post : असम सीएम ने मांगी माफी

पोस्ट पर विवाद बढ़ने के बाद असम सीएम के आधिकारिक एक्स हैंडल से एक और पोस्ट किया गया। जिसमें मुख्यमंत्री ने अपना पक्ष रखते हुए कहा, नियमित तौर पर मैं हर सुबह अपने सोशल मीडिया हैंडल पर भगवद गीता का एक श्लोक अपलोड करता हूं।
अब तक, मैंने 668 श्लोक पोस्ट किए हैं। हाल ही में मेरी टीम के एक सदस्य ने अध्याय 18 श्लोक 44 से एक श्लोक गलत अनुवाद के साथ पोस्ट किया। जैसे ही मुझे गलती का एहसास हुआ, मैंने तुरंत पोस्ट हटा दी। महापुरुष श्रीमंत शंकरदेव के नेतृत्व में सुधार आंदोलन की बदौलत असम राज्य जातिविहीन समाज की एक आदर्श तस्वीर दर्शाता है। अगर डिलीट की गई पोस्ट से किसी को ठेस पहुंची है तो मैं तहे दिल से माफी मांगता हूं।
Assam CM Viral Post : ओवैसी ने बोला था हमला

असम सीएम के विवादित पोस्ट पर एआईएमआईएम सुप्रीमो असदुद्दीन ओवैसी ने निशाना साधा था। उन्होंने एक्स पर लिखा, हाल ही में हटाए गए एक पोस्ट में, असम के सीएम ने समाज के बारे में अपने दृष्टिकोण के बारे में विस्तार से बताया। “…खेती, गोपालन और वाणिज्य वैश्यों का स्वाभाविक कर्तव्य है और ब्राह्मणों, क्षत्रियों और वैश्यों की सेवा करना शूद्रों का स्वाभाविक कर्तव्य है।”संवैधानिक पद पर रहते हुए आपकी शपथ प्रत्येक नागरिक के साथ समान व्यवहार करने की है। यह उस दुर्भाग्यपूर्ण क्रूरता में परिलक्षित होता है जिसका असम के मुसलमानों ने पिछले कुछ वर्षों में सामना किया है। हिंदुत्व स्वतंत्रता, समानता, बंधुत्व और न्याय का विरोधी है।
बता दें कि असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा बीजेपी के एक नये फायरब्रांड हिंदू लीडर के तौर पर उभरे हैं। वो असम में रह रहे बांग्लादेशी मुसलमानों को मियां मुस्लिम संबोधित कर उन्हें बाहरी बताते हैं। उनकी सरकार ने हाल फिलहाल में ऐसे कई एक्शन लिए हैं, जिसको लेकर विपक्ष का आरोप है कि यह समुदाय विशेष को निशाना बनाने के लिए उठाए गए हैं।









