Azam Khan-Akhilesh Yadav meeting: 23 महीने बाद आज होगी आज़म खान-अखिलेश की मुलाकात, चार्टर प्लेन से रामपुर जाएंगे सपा प्रमुख

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Azam Khan-Akhilesh Yadav meeting: उत्तर प्रदेश की राजनीति का तापमान एक बार फिर बढ़ गया है। विपक्षी समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव आज चार्टर प्लेन से सीधे रामपुर पहुंचेंगे, जहां वो पार्टी के कद्दावर नेता और महासचिव आज़म खान से मुलाकात की। (Azam Khan-Akhilesh Yadav meeting) 23 महीने जेल में रहने के बाद 23 सितंबर को जमानत पर रिहा हुए आज़म खान की सपा के किसी बड़े नेता के साथ यह पहली औपचारिक मुलाकात है, जिसके गहरे सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। यह मुलाकात केवल शिष्टाचार भेंट नहीं, बल्कि आज़म खान की कथित नाराज़गी दूर करने और उत्तर प्रदेश के मुस्लिम वोट बैंक को एक निर्णायक संदेश देने की अखिलेश यादव की रणनीतिक कवायद मानी जा रही है।

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Azam Khan-Akhilesh Yadav meeting: ‘नाराज़गी दूर करने की कवायद’: 23 महीने बाद मुलाकात

आज़म खान की जेल से रिहाई के बाद से ही, पार्टी के बड़े नेताओं का उनसे मिलने न जाना चर्चा का विषय बना हुआ था। आज़म की नाराजगी उनके बयानों के ज़रिए भी समय-समय पर झलकती रही है। (Azam Khan-Akhilesh Yadav meeting) जब आज़म खान सीतापुर जेल से बाहर आए थे, तो उन्हें रिसीव करने सपा का कोई बड़ा नेता नहीं पहुंचा था। तब उनके बड़े बेटे अदीब ही समर्थकों के साथ मौजूद थे। जेल से बाहर आने के बाद आज़म खान ने कहा था कि वह पहले अपनी सेहत ठीक करेंगे, फिर राजनीति देखेंगे। (Azam Khan-Akhilesh Yadav meeting) इस दौरान उनके सपा छोड़ने और बसपा में जाने तक की अटकलें लगने लगी थीं। अखिलेश यादव का खुद रामपुर जाना, वरिष्ठ नेता की सेहत का हाल जानने के साथ-साथ उनके और पार्टी के बीच पनपे गिले-शिकवे दूर करने की स्पष्ट कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। अखिलेश यादव ने बरेली के अमौसी एयरपोर्ट से सड़क मार्ग के जरिए रामपुर की यात्रा की और आज़म खान के साथ करीब एक घंटे तक मुलाकात का कार्यक्रम निर्धारित है।

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पार्टी के फैसलों में अहम रोल का संदेश

हाल के दिनों में ऐसा कहा जा रहा था कि सपा अब रामपुर में आज़म खान की छाया से निकलने की रणनीति पर काम कर रही है। 2024 के लोकसभा चुनाव में रामपुर से आज़म खान की पसंद को दरकिनार कर मौलाना मोहिबुल्ला नदवी को टिकट दिया गया था, जिसने इन अटकलों को और बल दिया था। (Azam Khan-Akhilesh Yadav meeting) आज़म खान की गिरफ्तारी के बाद से ही पार्टी के फैसलों में उनका रोल कम हो गया था, जिससे उनके हाशिए पर जाने की आशंका थी। सपा ने आज़म को जेल में रहते हुए भी महासचिव की जिम्मेदारी दी थी। अब अखिलेश का उनसे मिलने जाना यह मैसेज दे रहा है कि पार्टी में उनकी उपेक्षा नहीं होगी और महत्वपूर्ण फैसलों में उनका अहम रोल बना रहेगा। यह कदम वरिष्ठ नेताओं का सम्मान बरकरार रखने की सपा की कोशिश को दर्शाता है।

20% मुस्लिम वोट बैंक को साधने की रणनीति

आज़म खान कभी सपा की मुस्लिम पॉलिटिक्स का सबसे बड़ा चेहरा हुआ करते थे। उनका प्रभाव कमजोर पड़ने से मुस्लिम मतदाताओं के बीच पार्टी की पकड़ भी ढीली होती गई थी। उत्तर प्रदेश की कुल आबादी में करीब 20 फीसदी मुस्लिम हैं। (Azam Khan-Akhilesh Yadav meeting) आज़म के गृह जिले रामपुर के साथ ही सहारनपुर, मेरठ, कैराना, मुजफ्फरनगर और बरेली समेत करीब दर्जनभर जिले ऐसे हैं, जहां मुस्लिम मतदाता जीत-हार तय करने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। मुस्लिम पॉलिटिक्स की पिच पर असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम (AIMIM) के रूप में नई चुनौती भी खड़ी है। ऐसे में अखिलेश यादव की आज़म खान से मुलाकात को मुस्लिम समुदाय को यह ठोस संदेश देने की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है कि सपा में उनका और उनके बीच के नेताओं का सम्मान अक्षुण्ण है। यह मुलाकात आगामी चुनावों के मद्देनजर मुस्लिम वोट को एकजुट रखने की दिशा में सपा का सबसे बड़ा राजनीतिक कदम है। (Azam Khan-Akhilesh Yadav meeting) अखिलेश यादव की इस पहल पर अब सबकी निगाहें टिकी हैं कि क्या वह अपने ‘चाचा-भतीजा’ के पुराने संबंधों को सुधारकर, आगामी चुनाव में मुस्लिम वोट बैंक की ताकत को पूरी तरह भुनाने में सफल हो पाते हैं।

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