BMC Mein BJP Ki Jeet: महाराष्ट्र की राजनीति में आज एक ऐसा भूचाल आया है जिसने बरसों पुराने किलों को ढहा दिया है। देश की सबसे अमीर नगर पालिका, बीएमसी (BMC) के रुझानों ने साफ कर दिया है कि मुंबई की सड़कों पर अब ‘कमल’ शान से खिलेगा। दशकों से जिस मुंबई पर ठाकरे परिवार का एकछत्र राज हुआ करता था, आज वहां भाजपा सबसे बड़ी शक्ति बनकर उभरी है। यह सिर्फ एक चुनाव नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की सियासत का वो टर्निंग पॉइंट है, जहाँ से इतिहास की एक नई इबारत लिखी जा रही है।
BMC Mein BJP Ki Jeet: मुंबई में पहली बार भाजपा का भगवा परचम
बीएमसी की 227 सीटों में से अब तक 158 सीटों के रुझान सामने आ चुके हैं और नतीजे चौंकाने वाले हैं। भाजपा अकेले 65 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, जबकि उसकी सहयोगी एकनाथ शिंदे की शिवसेना 18 सीटों पर आगे है। दूसरी तरफ, अपनी साख बचाने की लड़ाई लड़ रही उद्धव ठाकरे की सेना 52 सीटों पर सिमटती दिख रही है। (BMC Mein BJP Ki Jeet) अगर ये रुझान जीत में तब्दील होते हैं, तो भाजपा का बीएमसी की सत्ता पर काबिज होने का बरसों पुराना सपना सच हो जाएगा। यह जीत इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि आज तक कोई भी पार्टी बीएमसी में भाजपा जितनी ताकतवर होकर नहीं उभरी थी।
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नागपुर और पुणे में विपक्ष का सूपड़ा साफ
सिर्फ मुंबई ही नहीं, बल्कि नागपुर और पुणे जैसे बड़े शहरों में भी भाजपा की ‘प्रचंड लहर’ देखने को मिल रही है। आरएसएस के गढ़ नागपुर में तो भाजपा ने जैसे विपक्ष का नामोनिशान मिटा दिया है। वहां 151 वार्डों में से भाजपा अकेले 94 पर आगे है और पूरी उम्मीद है कि अंतिम नतीजों तक भाजपा अपने दम पर ‘सेंचुरी’ लगा लेगी। (BMC Mein BJP Ki Jeet) वहीं पुणे में अजित पवार और शरद पवार की जोड़ी भी भाजपा के रथ को नहीं रोक पाई। पुणे में भाजपा 47 सीटों पर आगे है, जबकि पूरा विपक्ष मिलकर भी 22 का आंकड़ा पार नहीं कर पा रहा है।
ब्रैंड फडणवीस की बढ़ी ताकत और ठाकरे ब्रदर्स की चुनौती
इन नतीजों ने साबित कर दिया है कि महाराष्ट्र में अब देवेंद्र फडणवीस ही सबसे बड़ा चेहरा हैं। इस जीत से न केवल उनका कद बढ़ेगा, बल्कि गठबंधन के भीतर भी भाजपा की पावर कई गुना बढ़ जाएगी। (BMC Mein BJP Ki Jeet) एक तरफ जहाँ एकनाथ शिंदे और अजित पवार की रफ्तार सुस्त पड़ी है, वहीं फडणवीस का ‘विजय रथ’ तेजी से दौड़ रहा है। दूसरी ओर, ठाकरे भाइयों उद्धव और राज के लिए यह अस्तित्व का संकट है। मुंबई जैसा मजबूत किला ढहने के बाद अब ठाकरे परिवार के वर्चस्व पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।















