Bombay High Court EVM check 2026: भारतीय चुनावी राजनीति में आज का दिन बेहद ऐतिहासिक और निर्णायक माना जा रहा है। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 के परिणाम आने के करीब डेढ़ साल बाद, मुंबई की ‘चांदीवली’ विधानसभा सीट की 20 EVM और VVPAT मशीनों की तकनीकी जांच (Diagnostic Check) आज सुबह 9:30 बजे से शुरू हो गई है। कांग्रेस के कद्दावर नेता नसीम खान की याचिका पर बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के बाद हो रही यह जांच देश के चुनावी इतिहास में अपनी तरह का पहला मामला बताया जा रहा है, जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है।
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Bombay High Court EVM check 2026: बोरीवली में ‘पहरे’ के बीच मशीनों का ‘पोस्टमार्टम’
मुंबई उपनगरीय जिला कलेक्टर के निर्देश पर बोरीवली ईस्ट स्थित सरकारी परिसर में यह प्रक्रिया शुरू की गई है। इस जांच के लिए बेंगलुरु से भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) के विशेषज्ञ इंजीनियरों की एक विशेष टीम बुलाई गई है। यह टीम अगले दो दिनों तक मशीनों के माइक्रोकंट्रोलर और ‘बर्न-मेमोरी’ की बारीकी से जांच करेगी। इस दौरान याचिकाकर्ता नसीम खान और अन्य उम्मीदवारों के प्रतिनिधियों को भी वहां मौजूद रहने की अनुमति दी गई है, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
नसीम खान की लंबी कानूनी लड़ाई और ‘जादुई’ जीत का पेच
यह पूरा विवाद नवंबर 2024 के चुनाव परिणामों से जुड़ा है। चांदीवली सीट पर बेहद कांटे की टक्कर हुई थी, जिसमें शिवसेना (शिंदे गुट) के दिलीप लांडे ने नसीम खान को बहुत ही कम अंतर से हराया था। नसीम खान ने तभी मतगणना में धांधली और मशीनों में छेड़छाड़ का आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने निर्धारित शुल्क जमा कर मशीनों की जांच की मांग की थी, जिसे लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद फरवरी 2026 में हाईकोर्ट ने मंजूरी दी। यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी लगातार EVM की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते रहे हैं।
क्या पहली बार हो रही है ऐसी जांच? चुनाव आयोग की सफाई
जहां एक ओर इसे ‘इतिहास में पहली बार’ बताया जा रहा है, वहीं चुनाव आयोग ने इस पर स्थिति स्पष्ट की है। महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी कि सुप्रीम कोर्ट के 2024 के दिशा-निर्देशों के तहत उम्मीदवारों को 5% मशीनों के सत्यापन का अधिकार है। आयोग के अनुसार, 2025 में ही महाराष्ट्र की 17 विभिन्न सीटों पर ऐसी जांच की जा चुकी है। हालांकि, नसीम खान के मामले में यह ‘ऐतिहासिक’ इसलिए है क्योंकि यह हाईकोर्ट के सीधे हस्तक्षेप और एक लंबी कानूनी लड़ाई के बाद हो रही ‘डायग्नोस्टिक चेक’ प्रक्रिया है।
क्या बदल सकता है चुनाव का परिणाम?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह जांच मुख्य रूप से एक ‘तकनीकी ऑडिट’ है। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि क्या मशीनों की मेमोरी या चिप के साथ कोई बाहरी छेड़छाड़ हुई थी। यदि जांच में कोई गंभीर विसंगति या ‘टैंपरिंग’ के प्रमाण मिलते हैं, तो यह न केवल चांदीवली के परिणाम को चुनौती दे सकता है, बल्कि पूरे देश में चुनावी प्रक्रिया और EVM की बहस को एक नया मोड़ दे सकता है। फिलहाल, पूरी मुंबई की नजरें बोरीवली की उस सीलबंद बिल्डिंग पर हैं, जहाँ मशीनों के भीतर बंद ‘लोकतंत्र का सच’ खंगाला जा रहा है।















