Brij Bhushan Sharan Singh: सांसद बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ शुक्रवार देर रात दिल्ली पुलिस ने दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज कर ली. दोनों ही एफआईआर कनाट प्लेस थाने में दर्ज की गई हैं. इसके साथ ही बीते लंबे समय से विवादों के बीच फंसे, रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष की मुसीबतें और ज्यादा बढ़ गई हैं. जबकि वहीं दूसरी ओर, एक साथ इन दो-दो एफआईआर का दर्ज होना, जंतर मंतर पर धरने पर बैठी महिला खिलाड़ी/पहलवान अपनी लड़ाई में पहली बड़ी जीत मान रही हैं. इस मामले की जांच की आंच अब भारत से बाहर निकल कर विदेश तक भी पहुंच सकती है.
दिल्ली पुलिस मुख्यालय के उच्च पदस्थ और विश्वस्त सूत्रों की मानें तो, (Brij Bhushan Sharan Singh) चूंकि, दर्ज दो में से एक एफआईआर में पॉक्सो एक्ट लगाया गया है. जोकि इस बात को साबित करता है कि घटना में कोई पीड़ित नाबालिग लड़की (पहलवान) भी रही है. जिसकी शिकायत के आधार पर पॉक्सो एक्ट लगाया गया. इन दोनों ही एफआईआर की जांच के लिए 7 महिला पुलिस अफसरान की टीम गठित की गई है.
इनमें एक महिला सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) होगी जो, महिला डीसीपी को रिपोर्ट करेंगी, दोनों ही एफआईआर दर्ज करने के फैसले को अंतिम जामा पहनाने के लिए, करीब 5 घंटे तक 10 से ज्यादा पुरुष और महिला अधिकारियों के साथ डीसीपी, कई एसीपी के बीच गहन मंत्रणा भी हुई. देर रात जब एफआईआर को लेकर अंतिम मजमून तैयार हो गया तो, दो अलग-अलग मुकदमे दर्ज कर दिए गए. दो मुकदमें दर्ज इसलिए किए गए क्योंकि एक में पॉक्सो एक्ट लगाने की जरूरत पड़ी.
ऐसे में दूसरी एफआईआर को भी अगर पॉक्सो एक्ट वाली एफआईआर में जोड़ दिया जाता, तो संभव था कि किसी भी पीड़ित और दो मे से किसी भी मुकदमे की जांच के साथ न्याय न हो पाता. एक संभावना यह भी थी कि दोनों एफआईआर का मजमून एक में ही समाहित कर दिए जाने पर, मुकदमे का अंत सही न हो पाता. जिसका पूरा पूरा लाभ मुलजिम या मुलजिमों अथवा संदिग्धों को मिल सकता था.
कहा जा रहा है कि इन दो एफआईआर में से एक मुकदमे की तफ्तीश भारत से बाहर भी जा सकती है. यह उस मुकदमे की तफ्तीश होगी जिसमें पॉक्सो एक्ट लगाया गया है. विदेश तक जांच की आंच इसलिए पहुंचने की प्रबल संभावनाएं हैं क्योंकि, नाबालिग पीड़िता (महिला रेसलर) ने अपने साथ विदेश में सेक्सुअल हरेसमेंट का आरोप लगाया है.
दिल्ली पुलिस ने मुहैया कराई सुरक्षा
मुकदमा दर्ज करते ही पीड़िता को दिल्ली पुलिस की ओर से सुरक्षा भी मुहैया करा दी गई है. क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने भी आदेश दिया था कि, पीड़ित/शिकायतकर्ता को दिल्ली पुलिस सुरक्षा मुहैया कराएगी. दोनों ही एफआईआर दर्ज करने से पहले, नई दिल्ली पुलिस टीम ने अपनी पूरी रणनीति दिल्ली पुलिस कमिश्नर संजय अरोड़ा को भी बताई-समझाई.
दिल्ली पुलिस पर भरोसा नहीं
दिल्ली पुलिस मुख्यालय के ही एक सूत्र की मानें तो, तय यह भी हुआ है कि जरूरत के हिसाब से वक्त पर, पुलिस टीमें (पड़ताली/तफ्तीश अफसरान) पीड़ित/पीड़िताओं के 164 के बयान कोर्ट में मजिस्ट्रेट के सामने भी दर्ज करा सकते हैं, क्योंकि मुकदमों में यौन उत्पीड़न जैसे संगीन आरोप दर्ज हैं. कहने को भले ही धरने पर बैठी महिला और पुरुष पहलवानों की मांग थी कि, दिल्ली पुलिस पर उन्हें भरोसा नहीं है. लिहाजा मुकदमा किसी और पुलिस से दर्ज कराया जाना चाहिए, शुक्रवार रात मगर जैसे ही दो-दो एफआईआर नई दिल्ली जिला थाने में दर्ज हो गईं, उसके बाद धरने पर बैठी या बैठे पहलवानों में से किसी ने इन दर्ज दोनों एफआईआर के विरोध में कोई बयान नहीं दिया.
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