CM Yogi 54th Birthday: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आज यानी शुक्रवार, 5 जून को 54वां जन्मदिन है। हिंदुत्व के बड़े प्रतीक माने जाने वाले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरक्षपीठ के महंत से लेकर एक बेहद कुशल और चालाक राजनीतिज्ञ बनकर उभरे हैं। गोरक्षपीठ जैसी पवित्र और बड़ी जगह के कठिन कामकाज की जिम्मेदारी को संभालते हुए, उन्होंने उत्तर प्रदेश के विकास में रोड़ा बनने वाले माफिया के मंसूबों को अपने बुलडोजर से पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। (CM Yogi Birthday) उन्होंने विकास की राह में आने वाली हर बाधा के चक्रव्यूह को बड़ी आसानी से तोड़ दिया। आज पूरी दुनिया देख रही है कि कैसे एक संन्यासी राजनीति के गलियारे का चाणक्य बन गया और ‘बुलडोजर बाबा’ के नाम से मशहूर हो गया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पांच साल का अपना पहला कार्यकाल बहुत ही शानदार तरीके से पूरा किया था। इसके बाद 25 मार्च 2022 को उन्होंने भारी बहुमत के साथ दूसरी बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर इतिहास रच दिया था। उन्होंने गोरखपुर शहर विधानसभा सीट से पहली बार खुद चुनाव लड़ा था और रिकॉर्ड वोटों से जीत हासिल कर पहली बार विधायक बनने का गौरव पाया था।
CM Yogi Birthday: काशी में अनोखे अंदाज में मना जन्मदिन
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 54वें जन्मदिन के मौके पर काशी में एक बेहद अनोखा और भव्य उत्सव देखने को मिला। (CM Yogi Birthday) काशी के प्रसिद्ध 51 फीट ऊंचे वरद आंजनेय हनुमान मंदिर में समर्थकों और श्रद्धालुओं ने एक विशेष आयोजन किया। इस दौरान सीएम योगी के 54वें जन्मदिन के प्रतीक के रूप में 54 किलो के लड्डू से बना एक शानदार केक काटा गया और सभी में प्रसाद बांटा गया।
इसके साथ ही, पर्यावरण की सुरक्षा और मुख्यमंत्री की लंबी उम्र की कामना के लिए मंदिर परिसर में 54 पौधे भगवान को समर्पित किए गए। इन सभी पौधों पर मुख्यमंत्री की जनकल्याणकारी योजनाओं से जुड़ी सुंदर तस्वीरें लगाई गई थीं, जो लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी रहीं। कार्यक्रम के अंत में मंदिर में भक्तों और समर्थकों ने मुख्यमंत्री के अच्छे स्वास्थ्य और सफल जीवन के लिए एक भव्य आरती भी उतारी।
सिर्फ 22 साल की उम्र में छोड़ दिया था घर-बार
बीजेपी के सबसे बड़े स्टार प्रचारकों में शामिल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का जन्म 5 जून 1972 को उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के पंचूर गांव में एक गढ़वाली राजपूत परिवार में हुआ था। इनके पिता का नाम स्वर्गीय आनंद सिंह बिष्ट और माता का नाम सावित्री देवी है। अपने सात भाई-बहनों में वे पांचवें नंबर पर आते हैं। उन्होंने सिर्फ 22 साल की छोटी सी उम्र में सांसारिक मोह-माया को हमेशा के लिए छोड़ दिया और संन्यास की राह चुन ली। वे ऋषिकेश और श्रीनगर के गढ़वाल विश्वविद्यालय से गणित विषय में बीएससी पास हैं।
साल 1993 में जब वे गणित में एमएससी की पढ़ाई कर रहे थे, उसी दौरान वे गोरखपुर आए थे। गोरखनाथ मंदिर में रहने के दौरान ही 15 फरवरी 1994 को उन्होंने ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ से दीक्षा ली और पूरी तरह संन्यासी बन गए। यहीं से उनका नाम अजय सिंह बिष्ट से बदलकर योगी आदित्यनाथ हो गया। साल 1996 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने महंत अवेद्यनाथ के चुनाव की पूरी कमान संभाली और साल 1998 में गुरुदेव ने उन्हें अपना असली उत्तराधिकारी घोषित कर चुनाव मैदान में उतार दिया।
26 साल की उम्र में सांसद और विवादों का नाता
गोरखपुर से 26 साल की उम्र में लोकसभा चुनाव जीतकर उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की एक धमाकेदार शुरुआत की थी। उस समय उन्हें देश के सबसे कम उम्र के सांसद होने का गौरव भी मिला था। जब योगी ने गुरु गोरक्षनाथ मंदिर के उत्तराधिकारी का काम संभाला, तो उनके कंधों पर स्कूलों, कॉलेजों, अस्पतालों और गोरक्षपीठ के पूरे प्रबंधन की बहुत बड़ी जिम्मेदारी आ गई। इसके साथ ही उन्होंने आम जनता की तकलीफों को दूर करना भी शुरू किया, जिससे उनकी पहचान तेजी से बढ़ती चली गई।
साल 1999 में हुए पचरुखिया कांड के बाद वे अचानक पूरे देश की चर्चाओं में आ गए। इसके बाद से उन पर कई तरह के आरोप भी लगे और गोरखपुर में हुए दंगे तथा कर्फ्यू के दौरान उन्हें जेल की हवा भी खानी पड़ी। वे धर्मांतरण के खिलाफ और घर वापसी के अभियानों के लिए काफी चर्चा में रहे, लेकिन वे अपने इरादों से कभी पीछे नहीं हटे। उन्होंने हिंदू युवा वाहिनी जैसे संगठनों को मजबूत कर हिंदुत्व और विकास का नारा बुलंद किया।
देश विरोधी ताकतों पर जमकर बरसे
योगी आदित्यनाथ ने एक सांसद के रूप में आतंकवाद, नक्सलवाद और देश विरोधी ताकतों से निपटने के लिए हमेशा खुले मंचों से बेहद आक्रामक भाषण दिए। उन्होंने साल 1998, 1999, 2004, 2009 और 2014 के लोकसभा चुनावों में लगातार पांच बार बंपर जीत हासिल की और सिर्फ 42 साल की उम्र में लगातार पांच बार सांसद बनने का एक बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया।
उनकी सुबह 3 बजे से शुरू होने वाली कठिन दिनचर्या में योग, पूजा-पाठ, गो-सेवा और जनता दरबार शामिल रहता है। मुख्यमंत्री बनने के बाद भी उनकी इस साधना में कोई कमी नहीं आई है। साल 2017 में पहली बार मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने राज्य की पूरी सूरत बदल दी। बिजली, पानी, सड़क और कानून व्यवस्था के मुद्दे पर उन्होंने जनता का दिल पूरी तरह जीत लिया है। उन्होंने अपनी काबिलियत के दम पर सरकार के सफल चार साल भी पूरे कर लिए हैं। आज उत्तर प्रदेश और पूरे देश के लोग उन्हें भविष्य के एक बहुत बड़े और कुशल प्रधानमंत्री के रूप में देख रहे हैं।















