CM Yogi Slams 7 SDMs: उत्तर प्रदेश की तहसीलों में दाखिल-खारिज, जमीन की पैमाइश, वरासत और संपत्ति विवादों की फाइलों पर कुंडली मारकर बैठने वाले अफसरों के खिलाफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सख्त रुख अपना लिया है। राज्य सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत बीते एक सप्ताह के भीतर जहां दस तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर 13 अफसरों को कारण बताओ नोटिस थमाया जा चुका है, वहीं अब सीएम योगी के कड़े रडार पर प्रदेश के सात उपजिलाधिकारी (एसडीएम) आ चुके हैं। जनता को राहत दिलाने के लिए मुख्यमंत्री के इस कड़े रुख से प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है।
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CM Yogi Slams 7 SDMs: डिजिटल सिस्टम से खुली ढिलाई की पोल
मुख्यमंत्री सचिवालय के कड़े निर्देशों के बाद राजस्व परिषद ने आरसीसीएमएस पोर्टल यानी राजस्व कोर्ट कंप्यूटर मैनेजमेंट सिस्टम के डिजिटल आंकड़ों का गहराई से विश्लेषण किया। इस डिजिटल समीक्षा में सामने आया कि कई तहसीलों के उपजिलाधिकारी अदालती फैसलों में भारी कोताही बरत रहे हैं। इस काली सूची में राजधानी लखनऊ की सरोजनीनगर और सदर तहसील के प्रशासनिक अधिकारी भी शामिल पाए गए हैं। परिषद ने इन सभी चिन्हित अफसरों से लिखित में जवाब तलब किया है और साफ चेतावनी दी है कि जवाब से संतुष्टि न मिलने पर कठोर विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई की संस्तुति की जाएगी।
सरोजनी नगर में सिर्फ 4 फीसदी मामलों का निपटारा
राजस्व परिषद की समीक्षा रिपोर्ट में सरोजनीनगर की एसडीएम (न्यायिक) की कार्यशैली सबसे निराशाजनक पाई गई। 22 दिसंबर 2025 से लेकर 31 मई 2026 के बीच उनके पास आए कुल 221 मामलों में से केवल 9 का ही निस्तारण हो सका, जो महज 4.07 प्रतिशत की चिंताजनक दर है। इसी तरह लखनऊ सदर एसडीएम कोर्ट में 1,000 मुकदमों में से केवल 403 का फैसला हो पाया। इसके अलावा मऊ जिले के मधुबन तथा प्रतापगढ़ की कुंडा और रानीगंज तहसीलों में तैनात उपजिलाधिकारियों का अदालती रिकॉर्ड भी बेहद खराब मिला। रानीगंज में 418 में से मात्र 133 और कुंडा में 297 में से सिर्फ 80 वादों का निपटारा किया गया।
जिलाधिकारियों को लिखित स्पष्टीकरण सौंपने के निर्देश
राजस्व परिषद के आयुक्त और सचिव ने संबंधित जिलों के जिलाधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए हैं कि वे चिन्हित अधिकारियों से अविलंब लिखित स्पष्टीकरण हासिल कर परिषद को भेजें। सभी मामलों की संकलित रिपोर्ट 23 सितंबर तक मुख्यमंत्री कार्यालय को सीधे सौंपी जानी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि आम जनता को तहसील के चक्कर काटने से मुक्ति दिलवाई जाए और जानबूझकर राजस्व मुकदमों को लटकाने वाले किसी भी जिम्मेदार अफसर को बख्शा न जाए।
संडीला, देवरिया और जौनपुर के तहसीलदारों पर गिरी गाज
राजस्व मामलों में लापरवाही बरतने के आरोप में हाल ही में हरदोई की संडीला तहसील के तहसीलदार अमित यादव, देवरिया के तहसीलदार कृष्ण कुमार मिश्रा, जौनपुर के तहसीलदार सौरभ कुमार, गाजीपुर के तहसीलदार रंजन वर्मा और प्रतापगढ़ के तहसीलदार अलख शुक्ला को सस्पेंड कर दिया गया है। इससे पहले सितंबर की शुरुआत में भी पांच राजस्व अधिकारियों को निलंबित किया जा चुका था। 29 अगस्त 2026 को मुख्यमंत्री द्वारा की गई उच्चस्तरीय बैठक के बाद से शुरू हुआ यह कड़ा प्रशासनिक शुद्धि अभियान आगे भी जारी रहने वाला है।









