Deoria News: 12 साल पहले मांगी थी मन्नत… मजार टूटने की खबर ने मां को रुला दिया, बेटे का हाथ पकड़कर दौड़ी देवरिया!

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Deoria News: उत्तर प्रदेश के देवरिया में अवैध मजारों पर प्रशासनिक कार्रवाई की खबर ने जहां जिले में भयंकर रूप से हलचल मचा दी, वहीं एक मां के दिल में सालों पुरानी आस्था, डर और मन्नत को फिर से उजागर कर दिया। देवरिया की रहने वाली रानी तिवारी के लिए यह खबर केवल एक प्रशासनिक सूचना नहीं थी, बल्कि 12 साल पहले मांगी गई उस मन्नत की याद थी, जो उनके जीवन से बेहद गहराई से जुड़ी हुई थी।

Deoria News: रानी तिवारी की मजार को लेकर आस्था

रानी तिवारी के अनुसार, लगभग 12 साल पहले उन्हें संतान नहीं हो रही थी। कई डॉक्टरों से इलाज कराया, लेकिन हर जगह से उन्हें निराशा ही हाथ लगी। (Deoria News) डॉक्टरों ने यहां तक कह दिया था कि आपका मां बनना मुश्किल है। उसी दौर में उन्होंने देवरिया स्थित इस मजार पर जाकर मन्नत मांगी थी कि यदि उन्हें संतान हुई तो वह चादर चढ़ाएंगी और दुआ अदा करेंगी। वक़्त बदला, हालात बदले और कुछ ही वक़्त बाद उनके घर बेटे का जन्म हुआ।

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मजार टूटने का डर

हालांकि, मन्नत पूरी होने के बाद रानी तिवारी किसी न किसी वजह से मजार नहीं आ सकीं। (Deoria News) समय बीतता गया और यह मन्नत उनके दिल में ही रह गई। इसी बीच जब उन्हें यह खबर मिली कि देवरिया में अवैध मजारों को तोड़ा जा रहा है, तो उनका मन बेचैन हो उठा। उस वक़्त वह गोरखपुर में रह रही थीं। खबर सुनते ही उन्हें डर सताने लगा कि यदि मजार टूट गई और वह अपनी मन्नत पूरी नहीं कर पाईं, तो यह मलाल उन्हें जिंदगी भर सालता रहेगा।

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इसी डर और आस्था के साथ 13 जनवरी को रानी तिवारी अपने बेटे का हाथ थामे देवरिया पहुंचीं। (Deoria News) मजार पर पहुंचते ही उनकी आंखें भर आईं। उन्होंने मजार कमेटी को चादर के लिए पैसा दिया और रोते हुए चादर चढ़ाई। उनका कहना था कि यदि वह यहां नहीं आ पातीं और भविष्य में उनके बेटे के साथ कुछ भी अनहोनी होती, तो वह खुद को कभी भी माफ नहीं कर पातीं।

मजार पर चादर चढ़ाकर उतारा बोझ

बता दे, रानी तिवारी के लिए यह पल केवल एक धार्मिक कर्मकांड नहीं था, बल्कि अपने दिल का बोझ हल्का करने का तरीका था। (Deoria News) चादर चढ़ाने के बाद उनके चेहरे पर सुकून साफ नजर आया। यह कहानी सिर्फ आस्था की नहीं, बल्कि एक मां के उस डर और विश्वास की है, जो अपने बच्चे की सलामती के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार रहती हैं। देवरिया की यह घटना बताती है कि प्रशासनिक निर्णयों के बीच भी आम लोगों की भावनाएं और आस्थाएं कितनी गहराई से जुड़ी होती हैं।

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