Donald Trump Slams Nobel Committee: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक बार फिर नोबेल शांति पुरस्कार नहीं मिला, तो उनका गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। अब ट्रंप ने इस फैसले को लेकर नॉर्वे तक को निशाने पर ले लिया है। उन्होंने कहा कि उन्होंने दुनिया में आठ संघर्षों को खत्म कराने में भूमिका निभाई, फिर भी उन्हें शांति पुरस्कार से दूर रखा गया।
शुक्रवार को न्यूयॉर्क के सिरैक्यूज में एक रैली के दौरान ट्रंप ने अपनी उपलब्धियां गिनाईं और नोबेल कमेटी के फैसले पर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने यहां तक कह दिया कि यह फैसला अमेरिका के लिए एक ऐसा दाग है, जिसे भुलाया नहीं जाएगा। यानी शांति पुरस्कार नहीं मिला, तो ट्रंप ने अपनी नाराजगी जाहिर करने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
Donald Trump Slams Nobel Committee: नोबेल नहीं मिला तो ट्रंप ने कमेटी पर ही उठा दिए सवाल
ट्रंप ने इस साल का नोबेल शांति पुरस्कार पाने वाली भारतीय मूल की दक्षिण अफ्रीकी मानवाधिकार वकील नवनेथम नवी पिल्लै को बधाई तो दी, लेकिन साथ ही पुरस्कार देने वाली नॉर्वेजियन नोबेल कमेटी पर निशाना भी साधा। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि इस साल पुरस्कार ऐसे व्यक्ति को दिया गया, जिसके बारे में लोगों ने शायद ही सुना हो।
ट्रंप का दावा है कि अमेरिका की ओर से उन्हें यह सम्मान मिलना चाहिए था। उन्होंने फैसले को शर्मनाक और निराशाजनक बताते हुए कहा कि पुरस्कार को कुछ ऐसे विचारधारा वाले लोगों ने बदनाम कर दिया है, जो उनके मुताबिक लोकतंत्र के खिलाफ हैं। ट्रंप की बातों से साफ था कि उन्हें पुरस्कार न मिलने का मलाल अब भी कम नहीं हुआ है।
आठ संघर्ष सुलझाने का दावा, आठ नोबेल पुरस्कार तक मांग डाले
ट्रंप ने अपनी रैली में एक बार फिर दावा किया कि उन्होंने दुनिया के आठ युद्धों और संघर्षों को खत्म कराने में भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि अगर हर संघर्ष के लिए अलग नोबेल शांति पुरस्कार दिया जाता, तो उन्हें आठ पुरस्कार मिलने चाहिए थे। इतना ही नहीं, ट्रंप ने रूस-यूक्रेन युद्ध और ईरान से जुड़े संघर्षों को सुलझाने के करीब पहुंचने का भी दावा किया।
उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने में भूमिका निभाई और इससे मध्य पूर्व समेत दुनिया के दूसरे हिस्सों में बड़े नुकसान को टालने में मदद मिली। हालांकि, ये ट्रंप के अपने दावे हैं, जिन्हें उन्होंने पुरस्कार न मिलने पर अपनी दलील के तौर पर पेश किया।
भारत-पाकिस्तान संघर्ष रोकने का दावा भी फिर दोहराया
ट्रंप ने एक बार फिर 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य संघर्ष का जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने दोनों देशों के बीच टकराव रुकवाया और संभावित परमाणु संघर्ष को टालकर करीब पांच करोड़ लोगों की जान बचाई। ट्रंप पहले भी इस तरह के दावे करते रहे हैं। इस बार भी उन्होंने अपनी बात को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए अपनी दावेदारी से जोड़ दिया। उनके बयान का अंदाज कुछ ऐसा रहा कि जब उन्होंने इतने बड़े-बड़े संघर्ष सुलझाए हैं, तो फिर शांति के लिए दिए जाने वाले सबसे प्रतिष्ठित सम्मान से उन्हें दूर क्यों रखा गया?
ओबामा को पुरस्कार मिलने पर भी उठाते रहे हैं सवाल
नोबेल शांति पुरस्कार पाने वाले अमेरिकी राष्ट्रपतियों में थियोडोर रूजवेल्ट, वुडरो विल्सन, जिमी कार्टर और बराक ओबामा के नाम शामिल हैं। ओबामा को 2009 में राष्ट्रपति बनने के पहले ही साल यह सम्मान मिला था। ट्रंप पहले भी ओबामा को पुरस्कार दिए जाने पर सवाल उठाते हुए कह चुके हैं कि उन्हें यह सम्मान कुछ किए बिना मिल गया। अब खुद पुरस्कार से वंचित रहने के बाद ट्रंप की नाराजगी एक बार फिर खुलकर सामने आ गई है।
नवी पिल्लै को क्यों मिला नोबेल शांति पुरस्कार?
2026 का नोबेल शांति पुरस्कार दक्षिण अफ्रीका में काम करने वाली मानवाधिकार वकील नवनेथम नवी’ पिल्लै को दिया गया। नोबेल कमेटी के मुताबिक, उन्हें शांति और अंतरराष्ट्रीय कानून को बढ़ावा देने के प्रयासों के लिए सम्मानित किया गया।
एक तरफ पिल्लै को उनके काम के लिए सम्मान मिला, तो दूसरी तरफ ट्रंप इस बात पर नाराज नजर आए कि उनके दावों और उपलब्धियों को पुरस्कार के लायक नहीं माना गया। फिलहाल, ट्रंप के बयान ने नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर एक बार फिर बहस छेड़ दी है और इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा उनके उस सवाल की हो रही है कि आठ संघर्ष सुलझाने के बाद भी उन्हें पुरस्कार क्यों नहीं मिला।









