Giriraj Singh on Hijab controversy: बिहार की सियासत में इन दिनों एक वीडियो ने ऐसा भूचाल ला दिया है जिसकी गूंज पटना से लेकर दिल्ली तक सुनाई दे रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक बार फिर अपनी ‘अजीबोगरीब’ हरकत के कारण चर्चा में हैं और इस बार मामला सीधे तौर पर एक महिला डॉक्टर की गरिमा और धार्मिक पहचान से जुड़ गया है। राजधानी पटना में आयोजित एक सरकारी कार्यक्रम का वीडियो जैसे ही सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, मानों पूरे राज्य की राजनीति दो धड़ों में बंट गई। (Giriraj Singh on Hijab controversy) जहाँ विपक्ष इसे मुख्यमंत्री की मानसिक स्थिति और महिलाओं के अपमान से जोड़कर देख रहा है, वहीं भाजपा और जेडीयू के नेता मुख्यमंत्री के बचाव में उतर आए हैं। इस पूरे विवाद में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह की दलील और यूपी के मंत्री संजय निषाद के एक बेहद चौंकाने वाले बयान ने आग में घी डालने का काम किया है।
Giriraj Singh on Hijab controversy: आखिर क्या था पटना के उस कार्यक्रम का पूरा मंजर?
यह पूरी घटना मंगलवार की है, जब पटना में 1200 से अधिक नवनियुक्त आयुष डॉक्टरों को नियुक्ति पत्र बांटने का भव्य कार्यक्रम चल रहा था। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मंच पर मौजूद थे और एक-एक करके डॉक्टरों को उनका भविष्य सौंप रहे थे। (Giriraj Singh on Hijab controversy) इसी बीच एक महिला डॉक्टर नियुक्ति पत्र लेने मंच पर आती हैं, जिन्होंने हिजाब पहना हुआ था। मुख्यमंत्री उनसे बात करते-करते अचानक उनका हिजाब खींच देते हैं। वीडियो में साफ दिख रहा है कि इस दौरान बगल में बैठे उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी उन्हें रोकने की कोशिश भी करते हैं, लेकिन तब तक यह पल कैमरों में कैद हो चुका था। (Giriraj Singh on Hijab controversy) देखते ही देखते यह वीडियो जंगल की आग की तरह फैल गया और आरजेडी ने इसे ढाल बनाकर मुख्यमंत्री के स्वास्थ्य पर गंभीर सवाल उठाने शुरू कर दिए।
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गिरिराज सिंह का समर्थन और ‘चेहरा’ दिखाने की दलील
जब इस विवाद ने तूल पकड़ा तो फायरब्रांड नेता और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के ढाल बनकर सामने आए। (Giriraj Singh on Hijab controversy) उन्होंने इस घटना में कुछ भी गलत होने से साफ इनकार कर दिया। गिरिराज सिंह ने पलटवार करते हुए सवाल पूछा कि अगर कोई सरकारी नियुक्ति पत्र लेने आया है, तो उसे अपना चेहरा दिखाने से भला क्यों डरना चाहिए? उन्होंने इसे पहचान से जोड़ते हुए तर्क दिया कि जब लोग वोट देने जाते हैं, तब भी तो उन्हें अपनी पहचान के लिए चेहरा दिखाना पड़ता है, तो यहाँ आपत्ति क्यों? गिरिराज सिंह के इस बयान ने विवाद को एक नया मोड़ दे दिया है और इसे सुरक्षा और पारदर्शिता के नजरिए से पेश करने की कोशिश की है।
‘पिता जैसा प्यार’ या राजनीतिक बचाव: जमा खान का बयान
नीतीश कैबिनेट में शामिल मुस्लिम मंत्री जमा खान ने भी इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री का जमकर बचाव किया है। उन्होंने विपक्षी दलों और मुस्लिम नेताओं पर पलटवार करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री को बदनाम करने की साजिश रची जा रही है। (Giriraj Singh on Hijab controversy) जमा खान के मुताबिक, नीतीश कुमार ने केवल एक ‘मुस्लिम बेटी’ के प्रति अपना स्नेह और प्यार दिखाया है। वह बस यह चाहते थे कि जब वह लड़की अपने जीवन में इतनी बड़ी सफलता हासिल कर रही है, तो समाज उसका चेहरा देखे। उन्होंने दावा किया कि जो लोग आज आलोचना कर रहे हैं, उन्हें यह नहीं भूलना चाहिए कि नीतीश कुमार ने ही बिहार की बेटियों को सबसे ज्यादा सम्मान और अधिकार दिए हैं।
संजय निषाद की फिसली जुबान और बढ़ता विवाद
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे विवादास्पद मोड़ तब आया जब उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री संजय निषाद ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने नीतीश कुमार का समर्थन करते-करते एक ऐसी टिप्पणी कर दी जिससे नया बखेड़ा खड़ा हो गया। (Giriraj Singh on Hijab controversy) संजय निषाद ने कहा कि “हिजाब खींचा है, अगर कहीं और छुआ होता तो क्या होता?” उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर उनकी जमकर किरकिरी होने लगी। हालांकि, मामला बिगड़ता देख उन्होंने तुरंत अपनी सफाई पेश की, लेकिन विपक्ष ने इसे महिला विरोधी मानसिकता का प्रमाण बता दिया है। अब देखना यह है कि क्या यह ‘हिजाब विवाद’ शांत होता है या आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति में और बड़े बदलाव लेकर आता है।









