Harish Rana Passive Euthanasia Case: मौत की बाट जोह रहे हरीश राणा…पिता के आंसू देख कांप जाएगी रूह, बोलेः दर्द बयां नहीं कर सकता…

Facebook
X
WhatsApp

Harish Rana Passive Euthanasia Case: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद स्थित राज एम्पायर सोसायटी में इन दिनों गहरा सन्नाटा पसरा हुआ है। कुछ समय पहले तक जिस घर के बाहर हरीश राणा का हाल जानने के लिए लोगों की भीड़ लगी रहती थी, आज वहां खामोशी है। पड़ोसी भी अब उस घर के बाहर रुकते हैं, लेकिन माहौल ऐसा है कि कोई कुछ कह नहीं पाता। वजह है हरीश राणा की वह स्थिति, जहां वह जिंदगी और मौत के बीच अंतिम दौर में हैं।

करीब 13 साल से बिस्तर पर पड़े हरीश राणा को इच्छा मृत्यु की अनुमति मिलने के बाद अब एम्स में उनकी जीवनरक्षक प्रणालियों को हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस फैसले ने न सिर्फ परिवार, बल्कि पूरे इलाके को भावुक कर दिया है। (Harish Rana Passive Euthanasia Case) हरीश के पिता अशोक राणा अपने बेटे की हालत को याद कर भावुक हो जाते हैं। उनकी आवाज भर्रा जाती है और वह कहते हैं कि उनके पास अपने दर्द को बयान करने के लिए शब्द नहीं हैं। वह बताते हैं कि उन्होंने खुद सिर्फ 12वीं तक पढ़ाई की, लेकिन सपना था कि उनका बेटा इंजीनियर बने और परिवार का नाम रोशन करे। उन्हें नहीं पता था कि एक दिन ऐसा भी आएगा, जब उन्हें अपने ही बेटे के लिए इच्छा मृत्यु की मांग करनी पड़ेगी।

Also Read –Indore Fire Accident: एक ही झटके में 7 जिंदगियां तबाह! EV चार्जिंग बनी मौत का कारण… दिल दहला देगा हादसा

Harish Rana Passive Euthanasia Case: जानें पूरा मामला

अशोक राणा बताते हैं कि उनका परिवार मूल रूप से हिमाचल प्रदेश से जुड़ा है। उनके गांव में कोई इंजीनियर नहीं था, इसलिए उन्होंने ठान लिया था कि उनका बेटा हरीश यह सपना पूरा करेगा। हरीश ने भी अपने पिता से वादा किया था कि वह इंजीनियर बनकर उनका नाम रोशन करेगा। (Harish Rana Passive Euthanasia Case) हरीश चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी से सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा था। लेकिन करीब 13 साल पहले एक हादसे ने सब कुछ बदल दिया। यूनिवर्सिटी की चौथी मंजिल से गिरने के बाद वह गंभीर रूप से घायल हो गया और कोमा में चला गया। उसके शरीर ने काम करना लगभग बंद कर दिया और वह पूरी तरह बिस्तर पर निर्भर हो गया।

Also Read –Nitish Kumar RS speculation 2026: आखिरी वक्त में नीतीश मारेंगे पलटी? RS जानें के फैसले बीच इस चीज ने बढ़ाई धड़कने, सहयोगी भी हक्के-बक्के

डॉक्टरों ने साफ कर दिया था कि उसके ठीक होने की कोई उम्मीद नहीं है। इसके बावजूद परिवार ने वर्षों तक इलाज जारी रखा। लेकिन जब हर कोशिश नाकाम हो गई, तब परिवार ने भारी मन से सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और इच्छा मृत्यु की अनुमति मांगी। (Harish Rana Passive Euthanasia Case) अब एम्स में हरीश के लाइफ सपोर्ट सिस्टम को हटाया जा चुका है। उन्हें दिए जाने वाले पोषण और पानी की नलियां हटा दी गई हैं, और ऑक्सीजन सपोर्ट भी बंद कर दिया गया है। फिलहाल उन्हें सिर्फ दिमाग से जुड़ी कुछ दवाएं दी जा रही हैं, ताकि उनकी तकलीफ कम की जा सके।

The specified slider does not exist.

ताजा खबरें