Mathura Idgah: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक अहम फैसले में मथुरा की शाही ईदगाह मस्जिद परिसर के सर्वेक्षण की इलाहाबाद हाईकोर्ट की अनुमति पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। यह फैसला लंबे समय से चल रहे कृष्ण जन्मभूमि-ईदगाह विवाद में मुस्लिम पक्ष के लिए झटका माना जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के 14 दिसंबर के फैसले पर रोक लगाने से इनकार किया, जिसमें मस्जिद परिसर का विस्तृत सर्वेक्षण और वीडियोग्राफी की अनुमति दी गई थी।
सर्वेक्षण का उद्देश्य विवादित स्थल के इतिहास और भौगोलिक स्थिति का पता लगाना है, जिससे भविष्य में होने वाली सुनवाई में मदद मिल सकती है।
मुस्लिम पक्ष ने सर्वेक्षण को रोकने की मांग की थी, (Mathura Idgah) यह दावा करते हुए कि यह उनकी धार्मिक आस्था का उल्लंघन है और विवादित स्थल के स्वामित्व पर उनके अधिकार को कमजोर करेगा।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को खारिज कर दिया और कहा कि सर्वेक्षण “न्याय के हित में” है और इसे किसी पार्टी के अधिकारों का उल्लंघन करने के लिए नहीं किया गया है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि सर्वेक्षण “पारदर्शी और संवेदनशील” तरीके से किया जाना चाहिए और किसी भी धार्मिक भावना को आहत नहीं पहुंचाना चाहिए।
Mathura Idgah: 18 दिसंबर को सर्वे को लेकर सुनाएगा फैसला
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मथुरा मस्जिद में सर्वे कराए जाने की मंजूरी के साथ ही यह भी आदेश दिया कि साफ फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी कराई जाए. (Mathura Idgah) हालांकि, वाराणसी के ज्ञानवापी मस्जिद के सर्वे से यह थोड़ा अलग सर्वे होगा. ज्ञानवापी में कोर्ट ने साइंटिफिक सर्वे कराया था.
मथुरा शाही मस्जिद के सर्वे के लिए एडवोकेट कमिश्नर कौन होगा? और इस सर्वे के लिए कितने दिनों का वक्त मिलेगा? इस पर इलाहाबाद हाईकोर्ट में अगले हफ्ते (18 दिसंबर) सुनवाई होगी. मथुरा की शाही ईदगाह मस्जिद विवाद से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस मयंक कुमार जैन ने पिछले महीने 16 नवंबर को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था.









