Parliament Winter Session : संसद के शीतकालीन सत्र का आज यानी बुधवार 13 दिसंबर को आठवां दिन है। लोकसभा और राज्यसभा दोनों की कार्रवाही सुबह 11 बजे से शुरू होगी। मंगलवार को राज्यसभा में मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्तियों, सेवा शर्तो को विनियमित करने वाला विधेयक सरकार की ओर से पेश किया गया। इस विधेयक पर बहस में 26 सांसदों ने हिस्सा लिया। विपक्षी सांसदों ने केंद्र पर इस बिल के जरिए चुनाव आयोग की निष्पक्षता को खत्म करने की कोशिश करने का आरोप लगाया।
विपक्ष ने कहा कि यह विधेयक सुप्रीम कोर्ट के फैसले को दरकिनार कर लाया गया है। अगर यह पारित हो गया तो चुनाव आयोग का महत्व कम हो जाएगा। इस बिल के विरोध में सभी विपक्षी सांसदों ने राज्यसभा से वॉकआउट कर दिया था। हालांकि, केंद्र सरकार इस विधेयक को उच्च सदन से पारित करवाने में सफल रही।
आज इस बिल को लोकसभा में पेश किया जाएगा। विपक्ष ने इस बिल को लोकसभा में भी पारित नहीं होने देने की चेतावनी दी है। विपक्षी सांसदों का कहना है कि इस बिल को पारित करने से चुनाव आयोग की निष्पक्षता को खतरा होगा। इसके अलावा, आज लोकसभा में सेंट्रल यूनिवर्सिटीज (संशोधन), केंद्र शासित पुडुचेरी और जम्मू-कश्मीर विधानसभा में वुमन रिजर्वेशन बढ़ाने वाले बिल पर भी चर्चा होगी।

Parliament Winter Session : विपक्षी सांसदों का आक्रोश
राज्यसभा में चुनाव आयोगों की नियुक्ति से संबंधित विधेयक पारित होने के बाद विपक्षी सांसदों का आक्रोश भड़क गया है। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने कहा कि इस बिल के माध्यम से सरकार ने लोकतंत्र को कुचलने का काम किया है।

सरकार ये बिल लाकर इस तीन सदस्यीय समिति में से भारत के मुख्य न्यायाधीश को बाहर का दरवाजा दिखाकर एक मनोनीत कैबिनेट मंत्री उसके जगह बैठा देती है यानी इस तीन सदस्यीय समिति में हमेशा दो वोट सरकार के पास होंगे। यानी सरकार तय करेगी कि चुनाव आयोग में कौन बैठेगा। चड्ढा ने कहा कि इस बिल पर सभी विपक्षी दलों के बीच चर्चा की जाएगी और फिर इस पर कानूनी राय लेकर इसे सुप्रीम कोर्ट में चैलेंज किया जाएगा।

Parliament Winter Session : क्या है चुनाव आयोगों की नियुक्ति से संबंधित विधेयक
इस विधेयक में चुनाव आयोगों की नियुक्ति की प्रक्रिया में बदलाव किया गया है। इस विधेयक के मुताबिक, चुनाव आयोगों की नियुक्ति के लिए एक तीन सदस्यीय समिति का गठन किया जाएगा। इस समिति में प्रधानमंत्री, विपक्षी दल के नेता और एक मनोनीत मंत्री शामिल होंगे। इस समिति में सरकार के पास दो वोट होंगे, जबकि विपक्षी दल के नेता और मनोनीत मंत्री के पास एक-एक वोट होगा। यानी, चुनाव आयोगों की नियुक्ति में सरकार की भूमिका बढ़ जाएगी।

विपक्ष का आरोप है कि यह विधेयक सुप्रीम कोर्ट के फैसले को दरकिनार कर लाया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने 2019 में एक फैसले में कहा था कि चुनाव आयोगों की नियुक्ति के लिए एक संवैधानिक समिति का गठन किया जाना चाहिए। इस समिति में प्रधानमंत्री, विपक्षी दल के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश शामिल होंगे।















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