Rajasthan borewell incident : राजस्थान के कोटपूतली-बहरोड़ क्षेत्र में 150 फीट गहरे खुले बोरवेल में गिरकर फंसी तीन साल की बच्ची चेतना के लिए चलाया जा रहा रेस्क्यू अभियान अब तक सफल नहीं हो सका है। बच्ची को बोरवेल से निकालने के लिए एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों ने तीन दिन से अधिक समय से बचाव कार्य जारी रखा है, लेकिन अभी तक कोई सकारात्मक परिणाम सामने नहीं आया है।
यह हादसा 29 दिसंबर 2024 को हुआ, जब भूपेंद्र नामक व्यक्ति ने अपने घर के बाहर एक बोरवेल खुदवाया था। हालांकि, 700 फीट तक पानी नहीं मिलने के कारण वह बोरवेल खुला छोड़ दिया गया था। उसी दिन भूपेंद्र की दो बेटियां चेतना (3) और काव्या (8) खेल रही थीं, और इस दौरान चेतना का पैर फिसलने के कारण वह बोरवेल में गिर गई।

रेस्क्यू ऑपरेशन में अब तक कई स्थानीय तकनीकों जैसे देशी जुगाड़, अंब्रेला तकनीक और पाइलिंग मशीन का उपयोग किया गया, लेकिन रेतीली जमीन और बोरवेल तक पहुंचने में आ रही कठिनाइयों के कारण कोई सफलता नहीं मिल सकी है। अब, उत्तराखंड से एक विशेष रैट माइनर्स (चूहा खदान विशेषज्ञ) की टीम को बुलाया गया है, जो अधिक कुशलता से बोरवेल तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।
चेतना की मां और परिवारवाले इस घटनाक्रम से अत्यंत परेशान हैं और लगातार रोते हुए अपने बच्चे की सलामती की दुआ कर रहे हैं। बचाव दल का कहना है कि इस दौरान बच्ची तक भोजन और पानी पहुंचाना मुमकिन नहीं हो पाया है, और इसकी स्थिति के बारे में भी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पाई है। बच्ची के परिवारवालों का कहना है कि रैट माइनर्स टीम से उन्हें काफी उम्मीदें हैं, क्योंकि यह विशेष टीम जटिल परिस्थितियों में भी सटीक तरीके से काम करती है।

गौरतलब है कि हाल ही में दौसा जिले में भी एक बोरवेल हादसा (Borewell Incident )हुआ था, जिसमें एक बच्चा आर्यन की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद प्रशासन ने सभी खुले बोरवेल को बंद करने की सलाह दी थी, लेकिन इसके बावजूद कई क्षेत्रों में खुले बोरवेल अभी भी मौजूद हैं, जो बच्चों और लोगों के लिए खतरे का कारण बने हुए हैं।

रेस्क्यू ऑपरेशन में शामिल अधिकारी अब भी अपनी पूरी मेहनत से बच्ची को सुरक्षित निकालने का प्रयास कर रहे हैं, जबकि परिवार और समुदाय की आंखों में सिर्फ एक ही उम्मीद है—चेतना का सकुशल रेस्क्यू।














