Ram Asare Kushwaha Quit BJP: उत्तर प्रदेश की राजनीति में आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी गर्माहट अभी से चरम पर पहुंचने लगी है। इसी बीच राज्य के राजनीतिक गलियारों से एक बड़ी खबर सामने आई है। उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री और दिग्गज ओबीसी नेता राम आसरे कुशवाहा ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन छोड़कर समाजवादी पार्टी (SP) की सदस्यता ग्रहण कर ली है। करीब 13 साल के लंबे इंतजार के बाद उनकी समाजवादी पार्टी में आधिकारिक तौर पर वापसी हुई है। चुनाव से ठीक पहले हुए इस बड़े राजनीतिक फेरबदल को बीजेपी के लिए एक बड़े झटके और सपा के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है।
Also Read –PM Modi Birthday: पीएम मोदी के नाम जुड़ीं 5 ऐसी उपलब्धियां, जिनकी आज हर तरफ हो रही चर्चा
Ram Asare Kushwaha Quit BJP: कौन हैं राम आसरे कुशवाहा
मूल रूप से कानपुर के रहने वाले राम आसरे कुशवाहा की राजनीतिक यात्रा काफी दिलचस्प और उतार-चढ़ाव भरी रही है। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत बहुजन समाज पार्टी (BSP) से की थी और साल 1996 में पहली बार बसपा के टिकट पर विधायक चुनकर आए थे। इसके बाद वे समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए, जहां उनका कद तेजी से बढ़ा। सपा में रहते हुए वे पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव जैसे बड़े पद पर रहे और उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव का बेहद करीबी व भरोसेमंद साथी माना जाता था। पिछड़े वर्ग से आने के कारण पूरे प्रदेश के ओबीसी समुदाय में उनकी एक मजबूत पकड़ मानी जाती है।
Also Read –PM Modi Birthday 2026: पीएम मोदी की कुंडली में सत्ता का राज! दिसंबर के बाद राजनीति में आएगा बड़ा मोड
2013 के मुजफ्फरनगर दंगों के बाद बिगड़े थे रिश्ते
साल 2013 में जब राम आसरे कुशवाहा सपा के राष्ट्रीय महासचिव थे, उस दौरान हुए मुजफ्फरनगर दंगों को लेकर उनका अपनी ही पार्टी से अलग रुख सामने आया था। उनके बयानों और पार्टी लाइन से अलग जाने की वजह से उन्हें पद से हटा दिया गया था। इसके बाद उनकी सपा से विदाई हो गई थी और यह मामला मीडिया में लंबे समय तक सुर्खियों में रहा था। सपा से अलग होने के बाद उन्होंने अपनी नई सियासी राह चुनी और वे भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए थे। हालांकि, बीजेपी में लंबा वक्त बिताने के बावजूद अब 13 साल बाद वे एक बार फिर अपनी पुरानी पार्टी में लौट आए हैं।
सपा में वापसी के मायने और चुनावी समीकरण पर असर
उत्तर प्रदेश में ओबीसी वोट बैंक को अपने पाले में बनाए रखने के लिए सभी राजनीतिक दल लगातार जोर लगा रहे हैं। ऐसे में राम आसरे कुशवाहा की सपा में वापसी को रणनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है। अखिलेश यादव के ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) अभियान को इससे काफी मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। कुशवाहा के पास संगठन में काम करने का और सरकार में मंत्री पद संभालने का लंबा अनुभव है, जो आगामी चुनाव में सपा के काम आ सकता है। 13 साल बाद पूरा हुआ यह सियासी चक्र आने वाले दिनों में यूपी की राजनीति में क्या नया रंग दिखाएगा, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।










