Rampur News: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आज़म खान के विवादित बयान मामले में आज रामपुर की MP/MLA कोर्ट अपना फैसला सुना सकती है। यह मामला साल 2019 के लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान दिए गए उस बयान से संबंधित है, जिसमें उन्होंने जिला प्रशासन और सरकारी अधिकारियों को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर बहुत ही चर्चित रही थी।
Rampur News: आजम खान की विवादित टिप्पणी
जानकारी के अनुसार, लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान आयोजित एक जनसभा में आजम खान ने मंच से अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा था कि “कलेक्टर-पलेक्टर से मत डरियो… ये तनख्वाहिया हैं… मायावती जी के फोटो में बड़े-बड़े अफसर जूते साफ करते दिखे हैं… उन्हीं से गठबंधन है, इन्हीं से जूते साफ करवाऊंगा।” इस बयान के वायरल होते ही विपक्षी दलों ने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था और प्रशासनिक अधिकारियों का अपमान बताया था।
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मामले पर आज हो सकता है बड़ा फैसला
मामले को गंभीर मानते हुए प्रशासन की तरफ से आजम खान के खिलाफ आदर्श आचार संहिता उल्लंघन और भड़काऊ बयान देने के आरोप में FIR दर्ज कराया गया था। इसके बाद यह मामला रामपुर की विशेष MP/MLA अदालत में लगातार सुनवाई के दौरान चला। पिछली सुनवाई में अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिस पर आज बड़ा फैसला होने की संभावना है।
जानकारी के मुताबिक, आज अदालत में अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष दोनों मौजूद रहेंगे। फिलहाल आजम खान रामपुर जेल में बंद हैं और उनके खिलाफ पहले से कई अन्य मामले भी विभिन्न अदालतों में विचाराधीन हैं। हालांकि, यह विवादित बयान वाला मामला सबसे चर्चित मामलों में से एक माना जा रहा है।
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राजनीतिक जानकारों का क्या कहना है ?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि आज अदालत का फैसला आ जाता है तो प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल देखने को मिल सकती है। चुनावी मंच से दिए गए नेताओं के बयानों को लेकर पहले भी कई बार विवाद सामने आते रहे हैं, लेकिन इस मामले में अदालत का फैसला भविष्य में राजनीतिक भाषणों की मर्यादा तय करने के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
वहीं, प्रशासनिक अधिकारियों से जुड़े संगठनों ने भी इस बयान पर पहले कड़ी नाराजगी जताई थी। उनका कहना था कि सार्वजनिक मंच से सरकारी अधिकारियों के सम्मान को ठेस पहुंचाने वाले बयान लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं हैं। अब सभी की निगाहें आज कोर्ट के फैसले पर टिकी हुई हैं।
बता दे, लगभग 7 साल पुराने इस मामले में फैसला आने के बाद यह साफ़ हो जाएगा कि अदालत इस बयान को किस माध्यम से देखती है और क्या आजम खान की कानूनी मुश्किलें और बढ़ेंगी या उन्हें राहत मिलेगी।















