Shankaracharya News: टोको, रोको और फिर सीधा ठोको…, शंकराचार्य ने बनाई ‘चतुरंगिणी सेना’; धर्म युद्ध की तैयारी?

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Shankaracharya News: ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने सनातन धर्म की रक्षा और गौरक्षा के उद्देश्य से ‘शंकराचार्य चतुरंगिणी सेना’ के गठन की घोषणा कर दी है। काशी स्थित शंकराचार्य घाट के श्रीविद्यामठ में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने इस नई संगठनात्मक संरचना और इसके उद्देश्य की विस्तार से जानकारी दी। इस पहल को सनातन परंपराओं के संरक्षण और सामाजिक जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

शंकराचार्य ने बताया कि यह सेना किसी पारंपरिक सैन्य बल की तरह नहीं, बल्कि एक संगठित सामाजिक-धार्मिक शक्ति के रूप में कार्य करेगी। इसका मुख्य उद्देश्य उन गतिविधियों पर अंकुश लगाना है, जो सनातन धर्म की मान्यताओं के विरुद्ध मानी जाती हैं, साथ ही गौ-रक्षा, मंदिरों की सुरक्षा और शास्त्रों के संरक्षण को बढ़ावा देना भी इसका प्रमुख लक्ष्य होगा। (Shankaracharya News) उन्होंने कहा कि अगले माघ मास की अमावस्या को वे संगम में एक अक्षौहिणी सैनिकों के साथ स्नान करेंगे, जिसके बाद इस सेना की औपचारिक सक्रियता शुरू होगी।

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Shankaracharya News: ‘टोको, रोको और ठोको’ का सिद्धांत

इस सेना की कार्यप्रणाली को स्पष्ट करते हुए शंकराचार्य ने ‘टोको, रोको और ठोको’ का तीन-स्तरीय सिद्धांत प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि यदि कोई व्यक्ति या समूह धर्म के विरुद्ध कार्य करता है, तो सबसे पहले उसे चेतावनी दी जाएगी। यदि वह नहीं मानता, तो उसके कार्यों को रोकने का प्रयास किया जाएगा। (Shankaracharya News) इसके बाद भी समाधान न निकलने पर ‘ठोको’ की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि ‘ठोको’ का अर्थ किसी भी प्रकार की हिंसा नहीं है, बल्कि यह पूरी तरह संवैधानिक और कानूनी कार्रवाई होगी, जिसमें प्रशासन और संबंधित अधिकारियों को शिकायत देकर कार्रवाई सुनिश्चित कराई जाएगी।

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27 सदस्यीय पदाधिकारी मंडल की भी घोषणा

चतुरंगिणी सेना के लिए देशभर से कुल 2 लाख 18 हजार 700 सदस्यों को जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। (Shankaracharya News) इस सेना में शामिल होने के लिए सभी वर्गों के लोगों का स्वागत होगा। साथ ही 27 सदस्यीय पदाधिकारी मंडल की भी घोषणा कर दी गई है, जिसकी अगुवाई स्वयं शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद करेंगे। सेना के सदस्यों के लिए पीले वस्त्र निर्धारित किए गए हैं और उनके हाथ में परशु (फरसा) प्रतीकात्मक रूप से होगा।

इस संगठन को एक व्यवस्थित ढांचे में ढालने के लिए इसे चार प्रमुख अंगों और 20 विभागों में विभाजित किया गया है। ‘मनबलांग’ में संत, विद्वान, पुरोहित, अधिवक्ता और मीडिया से जुड़े लोग शामिल होंगे, जो वैचारिक और कानूनी स्तर पर धर्म का पक्ष मजबूत करेंगे। (Shankaracharya News) ‘तनबलांग’ में शारीरिक रूप से सक्षम युवाओं को शामिल किया जाएगा, जो पारंपरिक युद्धक कलाओं के माध्यम से धर्म रक्षा के कार्यों में जुटेंगे। ‘जनबलांग’ में विभिन्न स्तरों के स्वयंसेवक होंगे, जो दैनिक से लेकर वार्षिक आधार पर सेवा कार्यों में सक्रिय रहेंगे। वहीं ‘धनबलांग’ इस संगठन का आर्थिक आधार होगा, जिसमें दानदाताओं और संसाधन उपलब्ध कराने वाले लोगों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। शंकराचार्य का यह कदम सनातन धर्म को संगठित करने और विशेष रूप से गौरक्षा के मुद्दे पर समाज में नई चेतना जागृत करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

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