Shankaracharya Ultimatum To CM Yogi: उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर धर्म और सरकार आमने-सामने खड़े नजर आ रहे हैं। काशी से उठी एक आवाज अब लखनऊ की दहलीज तक पहुंचने को तैयार है। ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने योगी सरकार के सामने साफ मांग रख दी है कि गौ को वही सम्मान दिया जाए, जो महाराष्ट्र में मिला है। उनका कहना है कि अगर 40 दिनों के भीतर फैसला नहीं हुआ, तो संत समाज सड़क से सदन तक अपनी बात रखेगा।
Shankaracharya Ultimatum To CM Yogi: गौ को राज्यमाता बनाने की मांग
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने उत्तर प्रदेश सरकार से गौ को ‘राज्यमाता’ घोषित करने की मांग की है। (Shankaracharya Ultimatum To CM Yogi) उन्होंने इसके लिए 40 दिन का समय देते हुए चेतावनी दी है कि मांग न माने जाने पर 10 और 11 मार्च को लखनऊ में विशाल संत समागम आयोजित किया जाएगा। इस समागम में देशभर से साधु-संत जुटेंगे और आगे की रणनीति तय की जाएगी।
सरकार से सवाल, धर्म की कसौटी क्या?
शुक्रवार को केदारघाट स्थित श्रीविद्या मठ में आयोजित प्रेसवार्ता में शंकराचार्य ने सरकार पर तीखे सवाल उठाए। (Shankaracharya Ultimatum To CM Yogi) उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने उनसे उनके पद और परंपरा का प्रमाण मांगा, जिसे उन्होंने सहजता से सौंप दिया। सरकार उन साक्ष्यों को नकार नहीं सकी। उन्होंने कहा कि हिंदू होना केवल भाषण देने या भगवा पहनने तक सीमित नहीं है। असली परीक्षा गो-सेवा और धर्म-रक्षा से होती है। जो सरकार गोवंश की रक्षा नहीं कर सकती, उसे सनातन हितैषी कहलाने का नैतिक अधिकार नहीं है।
इतिहास की पीड़ा और आज की लड़ाई
शंकराचार्य ने कहा कि आज के समय में गोमाता की रक्षा और गोहत्या बंदी कानून की मांग करना सबसे बड़ा अपराध बना दिया गया है। (Shankaracharya Ultimatum To CM Yogi) उन्होंने 1966 का जिक्र करते हुए कहा कि तब भी धर्मसम्राट स्वामी करपात्री महाराज और अन्य संतों पर अत्याचार हुए थे। आज भी वही इतिहास दोहराया जा रहा है। गौभक्तों को डराया जा रहा है और उनकी छवि खराब करने की कोशिश हो रही है।
महाराष्ट्र और नेपाल का उदाहरण
उन्होंने सवाल उठाया कि जब महाराष्ट्र में गाय को राज्यमाता का दर्जा दिया जा सकता है, तो श्रीकृष्ण की भूमि उत्तर प्रदेश में ऐसा क्यों नहीं हो सकता। (Shankaracharya Ultimatum To CM Yogi) नेपाल में तो गाय को राष्ट्रीय पशु का दर्जा प्राप्त है। फिर यूपी पीछे क्यों?
निर्यात के नाम पर गोवंश हत्या का आरोप
शंकराचार्य ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि देश के कुल मांस निर्यात में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत से अधिक है। उन्होंने सवाल किया कि क्या रामराज्य का सपना गायों के रक्त से कमाई गई विदेशी मुद्रा पर आधारित होगा। उनके इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति और धार्मिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।















