
Sikkim Landslide: सिक्किम में कुदरत का कहर एक बार फिर देखने को मिला है। पश्चिमी सिक्किम के यांगथांग इलाके में गुरुवार देर रात हुए एक भीषण भूस्खलन ने पूरे क्षेत्र को हिलाकर रख दिया है। इस भयानक त्रासदी में अब तक चार लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि तीन लोग अभी भी लापता हैं। (Sikkim Landslide) पुलिस और स्थानीय लोगों की टीमें जान जोखिम में डालकर राहत और बचाव कार्य में जुटी हैं। यह घटना एक बार फिर पहाड़ों में हो रहे अनियंत्रित भूस्खलनों पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
Sikkim Landslide: जान बचाने की ‘असंभव’ कोशिश
सिक्किम पुलिस द्वारा जारी किए गए एक वीडियो में, बचाव दल के अधिकारी उफनती हुई ह्यूम नदी के पास रस्सी के सहारे खड़े दिखाई दे रहे हैं। पुलिस की टीम ने एसएसबी कर्मियों और स्थानीय लोगों के साथ मिलकर एक जोखिम भरा ऑपरेशन चलाया। (Sikkim Landslide) उन्होंने पेड़ों की लकड़ियों से एक अस्थायी पुल बनाकर प्रभावित क्षेत्र से दो घायल महिलाओं को सुरक्षित निकालने में कामयाबी हासिल की। हालांकि, एसपी शेरिंग शेरपा ने बताया कि जिला अस्पताल में इलाज के दौरान उनमें से एक महिला ने दम तोड़ दिया, जबकि दूसरी महिला की हालत अभी भी गंभीर है।
भूस्खलन की ‘डरावनी’ चेन
इस हफ्ते सिक्किम में यह दूसरी बड़ी घटना है। सोमवार को भी इसी तरह के भूस्खलन में ग्यालशिंग जिले में एक महिला की मौत हो गई थी। पुलिस के मुताबिक, भारी बारिश के कारण पूरे क्षेत्र में कई भूस्खलन हुए हैं, जिससे जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। ये घटनाएं साफ तौर पर दिखाती हैं कि प्रकृति अब और अधिक सहन नहीं कर सकती है। इस तरह के हादसों की बढ़ती संख्या न सिर्फ हिमालयी क्षेत्रों के लिए एक बड़ा खतरा है, बल्कि यह भी बताती है कि हमें प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर चलने की जरूरत है। प्रशासन और सरकार को इस तरह के हादसों से निपटने के लिए और अधिक प्रभावी कदम उठाने होंगे।














