Swami Avimukteshwaranand: माघ मेले से खदेड़े जाएंगे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद? प्रशासन का अल्टीमेटम- छिन सकती है जमीन, लगेगा बैन

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Swami Avimukteshwaranand: प्रयागराज के पवित्र संगम तट पर चल रहे माघ मेले में आस्था की डुबकी के बीच एक ऐसा भूचाल आया है, जिसने पूरे संत समाज और प्रशासन को आमने-सामने ला खड़ा किया है। माघ मेले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ शुरू हुआ विवाद अब थमने के बजाय और भी उग्र रूप लेता जा रहा है। अब तक तो बात सिर्फ शंकराचार्य की पदवी को लेकर सबूत मांगने तक सीमित थी, लेकिन अब जो खबर सामने आई है, उसने हड़कंप मचा दिया है। मेला प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को माघ मेले से बाहर निकालने और उनकी सारी सुविधाएं छीनने की तैयारी कर ली है। जी हां, प्रशासन ने एक बेहद सख्त नोटिस जारी किया है जिसमें साफ चेतावनी दी गई है कि अगर जवाब नहीं मिला, तो न केवल उनकी जमीन वापस ले ली जाएगी, बल्कि भविष्य में उनके मेले में घुसने पर भी प्रतिबंध लगा दिया जाएगा।

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Swami Avimukteshwaranand: एक नहीं, दो-दो नोटिस का खेल

अब तक सबको यही पता था कि मेला अथॉरिटी ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से उनके शंकराचार्य होने का सबूत मांगा है। लेकिन हकीकत कुछ और ही है। (Swami Avimukteshwaranand) प्रशासन ने उन्हें एक नहीं, बल्कि दो नोटिस भेजे थे। जिस नोटिस की चर्चा हर जगह हो रही है, वह तो बाद में भेजा गया दूसरा नोटिस था। (Swami Avimukteshwaranand) असली खेल तो पहले नोटिस में छिपा था, जिसकी जानकारी खुद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को भी नहीं थी। 18 जनवरी, यानी मौनी अमावस्या के ठीक उसी दिन एक नोटिस जारी किया गया था, जिसमें प्रशासन के तेवर बेहद तल्ख थे। यह नोटिस स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की दो प्रमुख संस्थाओं, श्री शंकराचार्य आश्रम शाकंभरी पीठ और बद्रिका आश्रम हिमालय सेवा शिविर के नाम जारी किया गया था।

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उस दिन बैरियर टूटने पर मचा था हड़कंप

आखिर 18 जनवरी 2026 को ऐसा क्या हुआ था कि प्रशासन इतना सख्त हो गया? नोटिस में मेला प्राधिकरण ने साफ लिखा है कि मौनी अमावस्या के दिन, जब संगम पर लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी थी, तब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद बिना किसी अनुमति के अपनी बग्घी लेकर स्नान के लिए जाने की जिद पर अड़ गए थे। (Swami Avimukteshwaranand) आरोप है कि उन्होंने और उनके समर्थकों ने पीपा पुल नंबर दो पर लगे पुलिस बैरियर को तोड़ दिया और भीड़ के बीच घुसने की कोशिश की। प्रशासन का कहना है कि उस वक्त वहां इतनी भीड़ थी कि बग्घी ले जाने से भगदड़ मच सकती थी और कई जानों को खतरा हो सकता था। इसी घटना को आधार बनाते हुए प्रशासन ने यह कड़ा कदम उठाया है।

जमीन छिनने और मेले से बाहर करने की धमकी

सबसे चौंकाने वाली बात इस ‘गुप्त’ नोटिस की चेतावनी है। इसमें सुप्रीम कोर्ट की रोक का हवाला देते हुए लिखा गया है कि अगर इस नोटिस का जवाब 24 घंटे के भीतर नहीं दिया गया, तो स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को माघ मेले में आवंटित की गई सारी भूमि और सुविधाएं तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दी जाएंगी। (Swami Avimukteshwaranand) इतना ही नहीं, उनके मेले में प्रवेश पर भी पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया जाएगा। यह एक तरह से प्रशासन का खुला अल्टीमेटम है। हालांकि, हैरानी की बात यह है कि 24 घंटे का समय तो कब का बीत चुका है, क्योंकि स्वामी जी का दावा है कि उन्हें यह नोटिस मिला ही नहीं।

स्वामी जी बोले- यह सरकार की बौखलाहट है

जब इस बारे में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से सवाल किया गया तो वह भी अवाक रह गए। उन्होंने हैरानी जताते हुए कहा कि उन्हें इस पहले नोटिस की कोई जानकारी ही नहीं थी। उन्होंने प्रशासन पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सरकार और अधिकारी पूरी तरह बौखला चुके हैं। (Swami Avimukteshwaranand) वे नोटिस का खेल खेलकर मौनी अमावस्या के दिन अपनी नाकामियों और उस घटना से लोगों का ध्यान भटकाना चाहते हैं। स्वामी जी ने यह भी सवाल उठाया कि 19 जनवरी वाला नोटिस तो तुरंत मिल गया, लेकिन 18 जनवरी वाला नोटिस तीन दिन बाद 21 जनवरी को क्यों सामने आया? (Swami Avimukteshwaranand) हालांकि, उन्होंने साफ कर दिया है कि वे डरने वाले नहीं हैं और इस नोटिस का भी करारा जवाब देंगे। अब देखना यह होगा कि क्या प्रशासन सच में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की जमीन छीनकर उन्हें मेले से बाहर करेगा या यह विवाद कोई नया मोड़ लेगा।

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