UP News : बेसिक शिक्षा विभाग के ट्रांसफर नीति के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने वाले सैंकड़ों सहायक अध्यापकों को झटका लगा है। अदालत ने उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार की ट्रांसफर नीति में दखल देने से इनकार कर दिया है। साथ ही कोर्ट ने सरकारी सेवा में कार्यरत पति-पत्नी के एक ही जिले में तैनाती पर भी बड़ा फैसला सुनाया है।
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इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने पति-पत्नी के एक ही जिले में तैनाती को अधिकार नहीं माना है। कोर्ट ने कहा कि यह एक विचारणीय विषय है, लेकिन यह कोई अनिवार्य अधिकार नहीं है। पति-पत्नी की एक ही स्थान पर तैनाती तभी संभव है, जबकि इससे प्रशासनिक आवश्यकताओं को कोई हानि न पहुंच रही हो।

UP News : बेसिक शिक्षा बोर्ड को दिया यह आदेश
यह फैसला बेसिक शिक्षा विभाग के ट्रांसफर नीति के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान आया है। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उनके जीवनसाथी सरकारी सेवा में हैं, लेकिन उनकी तैनाती अलग-अलग जिलों में है। इससे उनके परिवार और व्यक्तिगत जीवन पर असर पड़ रहा है।

याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति ओम प्रकाश शुक्ला की एकल पीठ ने कहा कि सरकारी सेवा में कार्यरत पति-पत्नी की एक ही स्थान पर तैनाती पर विचार किया जा सकता है, लेकिन यह कोई अनिवार्य अधिकार नहीं है। कोर्ट ने कहा कि सरकार को इस बात का ध्यान रखना होगा कि इससे प्रशासनिक आवश्यकताओं को कोई हानि न पहुंचे।

UP News : याचियों ने सरकार की नीति को किया था चैलेंज
याचियों का कहना था कि उनके जीवनसाथी राष्ट्रीयकृत बैंकों, एलआईसी, विद्युत वितरण निगमों, एनएचपीसी, भेल, इंटरमीडिएट कॉलेजों, पॉवर कॉर्पोरेशन व बाल विकास परियोजना इत्यादि पब्लिक सेक्टर्स में तैनात हैं। याचियों की तैनाती अपने जीवनसाथी से अलग जनपदों में है। याचिका में आगे कहा गया कि 2 जून 2023 को शासन की ओर से जारी आदेश में कहा गया कि जिन अध्यापकों के पति या पत्नी सरकारी सेवा में हैं, उनके लिए अन्तर्जनपदीय तबादले की व्यवस्था की गई है। मगर 16 जून 2023 को शासन की ओर से जारी एक दूसरे आदेश में कहा गया कि सरकारी सेवा में उन्हीं कर्मचारियों को तैनात माना जाएगा जो संविधान के अनुच्छेद 309 के अधीन हैं। याचियों ने इसे संविधान में प्रदत समानता के अधिकार का उल्लंघन करार देते हुए अदालत में चुनौती दी थी।हालांकि, कोर्ट ने कहा है कि सरकार इस विषय पर विचार कर सकती है।









