रिपोर्ट -रानू सिंह
UP News: बाराबंकी। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा हाल ही में जारी की गई नई गाइडलाइनों के विरोध में जनसत्ता राष्ट्रवादी एकता पार्टी एवं अखिल क्षत्रिय महासभा के पदाधिकारियों ने संयुक्त रूप से जिलाधिकारी बाराबंकी शशांक त्रिपाठी को ज्ञापन सौंपा। यह ज्ञापन राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को संबोधित किया गया, जिसे जिलाधिकारी के माध्यम से भेजा गया।
जनसत्ता राष्ट्रवादी एकता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ठाकुर धनराज प्रताप सिंह ‘राणा सिंह सूर्यवंशी’ एवं संस्थापक/राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष धरिन्द्र सिंह के नेतृत्व में दिए गए इस ज्ञापन में UGC की नई गाइडलाइनों पर आपत्ति जताई गई है।
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ज्ञापन में कहा गया कि इन नई गाइडलाइनों के लागू होने से देशभर के विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों, छात्रों और अभिभावकों के बीच चिंता और असुरक्षा का माहौल बन रहा है। शिकायत को बिना प्राथमिक जांच के सही मानकर कार्रवाई किए जाने की व्यवस्था को प्राकृतिक न्याय के खिलाफ बताया गया है। (UP News) इससे पक्षपातपूर्ण कार्रवाई और गलत शिकायतों के दुरुपयोग की आशंका बढ़ गई है।
पार्टी का कहना है कि झूठी या दुर्भावनापूर्ण शिकायत करने वालों के खिलाफ कोई स्पष्ट दंड व्यवस्था नहीं होने से व्यक्तिगत दुश्मनी निकालने की संभावना बढ़ जाती है। (UP News) जबकि भारतीय न्याय संहिता, SC/ST एक्ट और विश्वविद्यालयों के आंतरिक नियम पहले से मौजूद हैं, ऐसे में अतिरिक्त सख्त दिशानिर्देश शिक्षा सुधार के बजाय अनावश्यक दबाव बनाने वाले प्रतीत होते हैं।
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UP News: ज्ञापन के माध्यम से मांग की गई कि—
UGC की नई गाइडलाइनों पर तत्काल रोक लगाई जाए
स्वतंत्र विशेषज्ञ या संसदीय समिति से इनका पुनरीक्षण कराया जाए
निष्पक्ष और पारदर्शी शिकायत निवारण व्यवस्था लागू की जाए
शिक्षकों और छात्रों की अकादमिक स्वतंत्रता की रक्षा सुनिश्चित की जाए
पार्टी ने कहा कि यदि समय रहते इन गाइडलाइनों पर विचार नहीं किया गया तो इसका नकारात्मक असर देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था पर पड़ सकता है।
इस दौरान अखिल क्षत्रिय महासभा के पदाधिकारी भी मौजूद रहे, जिनमें—
रणविजय सिंह (अध्यक्ष),
अमित सिंह (राष्ट्रीय महासचिव),
विद्या सिंह (प्रदेश सचिव) और
पूनम सिंह (जिला अध्यक्ष) शामिल रहीं।
सभी पदाधिकारियों ने एक मत से UGC की नई गाइडलाइनों को अव्यावहारिक बताते हुए इन्हें वापस लेने की मांग की और कहा कि शिक्षा में सुधार संवाद और संतुलन से होना चाहिए, न कि डर के माहौल से।















