UP Panchayat Elections News: योगी सरकार का बड़ा फैसला, जिला पंचायत अध्यक्षों की मनमानी पर लगाम; अब नहीं…

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UP Panchayat Elections News: उत्तर प्रदेश की सियासत में इन दिनों पंचायत चुनाव की आहट के साथ ही प्रशासनिक गलियारों में भी गर्मी बढ़ गई है। लेकिन इस बार चर्चा किसी उम्मीदवार की नहीं, बल्कि उन कर्मचारियों की है जिनकी सैलरी महीनों से अटकी हुई थी। योगी सरकार ने ऐसा कदम उठाया है, जिसने एक झटके में हजारों अधिकारियों-कर्मचारियों के चेहरे पर मुस्कान लौटा दी है। सरकार ने साफ कर दिया है कि अब मनमानी नहीं चलेगी और किसी भी कीमत पर कर्मचारियों के अधिकारों से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं होगा।

UP Panchayat Elections News: जिला पंचायत अध्यक्षों पर कसा शिकंजा

पंचायती राज विभाग ने सभी जिला पंचायत अध्यक्षों को सख्त पत्र भेजकर स्पष्ट कर दिया है कि अधिकारियों और कर्मचारियों का वेतन रोकने का उन्हें कोई कानूनी अधिकार नहीं है। (UP Panchayat Elections News) शासन का कहना है कि यह गलत परंपरा लंबे समय से चल रही थी, जिसे अब खत्म किया जाएगा। यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब पंचायत चुनाव की तैयारियां जोरों पर हैं और प्रशासनिक निष्पक्षता बेहद जरूरी मानी जा रही है।

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UP Panchayat Elections News: लखनऊ और कौशांबी के मामलों से बढ़ी सख्ती

सरकार की यह सख्ती यूं ही नहीं आई। राजधानी लखनऊ से मामला सामने आया, जहां जिला पंचायत अध्यक्ष आरती रावत पर आरोप लगा कि कुछ कर्मचारियों का वेतन करीब चार महीनों तक रोक दिया गया। (UP Panchayat Elections News) इसी तरह की शिकायतें कौशांबी से भी मिलीं। इन मामलों को गंभीर और अमानवीय मानते हुए प्रमुख सचिव पंचायती राज अनिल कुमार तृतीय ने तत्काल नए दिशा-निर्देश जारी कर दिए। शासन ने दो टूक कहा कि बिना ठोस कानूनी आधार के वेतन रोकना पूरी तरह गलत है।

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नियुक्ति का अधिकार शासन के पास

पंचायती राज विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि सेंट्रल ट्रांसफरेबल कैडर के कर्मचारियों का नियुक्ति प्राधिकारी स्वयं राज्य सरकार है। (UP Panchayat Elections News) ऐसे में जिला पंचायत अध्यक्ष न तो उनका वेतन रोक सकते हैं और न ही उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई कर सकते हैं। यदि किसी कर्मचारी के खिलाफ शिकायत है तो उसे साक्ष्यों के साथ शासन को भेजा जाए, फैसला वहीं से होगा।

कर्मचारियों में राहत और चुनावी असर

इस फैसले के बाद प्रदेशभर के पंचायत कार्यालयों में खुशी की लहर है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि अब राजनीतिक दबाव और निजी रंजिश के चलते वेतन रोकने की प्रवृत्ति पर लगाम लगेगी। जानकार मानते हैं कि पंचायत चुनाव से पहले यह फैसला प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने और निष्पक्ष माहौल बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।

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