UP Politics: आने वाली 28 फरवरी को भारतीय जनता पार्टी यानी BJP के अध्यक्ष जेपी नड्डा और गृहमंत्री अमित शाह पश्चिमी यूपी पहुंचेंगे। यहां वो खास 12 सीटों के लिए अलग से रणनीति बनाएंगे। क्यों?
दरअसल, 2019 में UP की 14 लोकसभा सीटों पर BJP की हार हुई थी। इनमें से उप-चुनाव में आजमगढ़ और रामपुर सीट जीत ली। अभी भी 12 सीट विरोधियों के पास है। अवध और पूर्वी उत्तर प्रदेश में अंबेडकरनगर, घोसी, लालगंज, श्रावस्ती, जौनपुर और रायबरेली भाजपा के पास नहीं है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की बात करें तो सहारनपुर, अमरोहा, मुरादाबाद, संभल, नगीना और बिजनौर सीटें विपक्षियों के पास है।
12 सीटों पर भाजपा ने बूथ स्तर तक किया होमवर्क
अब 12 सीटों पर भाजपा ने बूथ स्तर तक होमवर्क किया है। (UP Politics) प्रत्येक सीट का जिम्मा एक-एक केंद्रीय मंत्री को सौंपा गया है। इसके अलावा लोकसभा क्षेत्र के विधानसभा क्षेत्रों का जिम्मा एक-एक एमएलसी के पास है। प्रदेश के मंत्री भी इन क्षेत्रों में लगाए गए हैं। उन्होंने 100-100 बूथों की जमीनी हकीकत परखकर हार का कारण समझा है। इसकी रिपोर्ट भी पार्टी नेतृत्व को पूर्व में ही भेज दी गई है।
पश्चिमी यूपी बीजेपी करेगी शुरुआत
बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर और गजरौला में जनसभाएं करंगे। भाजपा के क्षेत्रीय महामंत्री हरिओम शर्मा ने बताया, “जेपी नड्डा पार्टी पदाधिकारियों के साथ बैठक करेंगे। चुनावी तैयारी पर भी चर्चा करेंगे। सहारनपुर में 28 फरवरी को 1 बजे से पहले और गजरौला में 2 बजे के बाद जनसभा की संभावना है, इसकी तैयारी चल रही है। राष्ट्रीय अध्यक्ष से अनुमति मिलना बाकी है।
हरिओम शर्मा ने बताया, “बैठक में भाजपा के अलावा अन्य संगठनों की पार्टी के कार्यक्रमों की रिपोर्ट देखी जाएगी। उन्हें चुनाव जीतने के टिप्स भी दिए जाएंगे। सोशल मीडिया को विशेष रूप से अलर्ट करेंगे। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की विरोधी पार्टियों के कब्जे वाली चार सीटों पर गृहमंत्री अमित शाह का भी दौरा होने की संभावना है।
उत्तर प्रदेश में बीजेपी की कमान जाट नेता भूपेंद्र सिंह चौधरी के पास है। वे मुरादाबाद के रहने वाले हैं। प्रदेश संगठन मंत्री कर्मवीर सिंह भी बिजनौर से हैं। मुस्लिमों बाहुल्य रामपुर शहर विधानसभा सीट और संसदीय सीट पर उप-चुनाव में कब्जा कर मुस्लिम मतों को अपना बनाने में कामयाबी हासिल की है, लेकिन मुस्लिम बाहुल्य संभल, अमरोहा और मुरादाबाद सीटें अभी भी चुनौती हैं। जबकि, 2014 के लोकसभा चुनाव में संभल, अमरोहा और मुरादाबाद सीटें बीजेपी के पास थी।













